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भ्रांति: कलीसिया में सिद्धांतों की घुसपैठ | कैसे पहचानें?

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भ्रांति: कलीसिया में सिद्धांतों की घुसपैठ कलीसिया में भ्रांति और गलत सिद्धांत कैसे घुसते हैं? बाइबल से जानिए झूठी शिक्षा को पहचानने के 3 तरीके और सत्य में स्थिर रहने का उपाय। हर सदी में कलीसिया के भीतर नई प्रथाएँ और मान्यताएँ आईं। कुछ प्रथाएँ धीरे-धीरे इतनी सामान्य हो गईं कि लोग उन्हें आरंभिक मसीहियत का हिस्सा मानने लगे। इसलिए हमें हर बात को परमेश्वर के वचन की कसौटी पर परखना चाहिए। प्रेरितों 17:11 में बेरिया के लोगों के बारे में लिखा है कि उन्होंने प्रेरितों की बात को भी पवित्रशास्त्र से मिलाकर देखा। यह लेख किसी व्यक्ति या समुदाय पर आक्षेप लगाने के लिए नहीं है। इसका उद्देश्य सत्य को इतिहास के प्रमाणों के साथ समझना है। पहली से तीसरी शताब्दी: सरल आरंभ बपतिस्मा (लगभग 150 ई.): आरंभिक स्रोत दिदाखे (Didache, अध्याय 7) में बहते पानी में डुबकी को प्राथमिकता दी गई है, और पानी की कमी होने पर तीन बार पानी डालने की अनुमति है। यानी डुबकी प्रमुख थी और छिड़काव वैकल्पिक। बाद में, विशेषकर तीसरी शताब्दी में, छिड़काव और उंडेलने का चलन बढ़ा। साइप्रियन (लगभग 250 ई.) ने इसका बचाव किया। मृतकों के लिए प...