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परमेश्वर का वचन मन में कैसे बसाएं, और क्यों ज़रूरी है?

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"जो बात हृदय में बस गई, वह जीवन की दिशा बदल देती है।" क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि कोई गाना दिनभर आपके मन में गूंजता रहा, बिना आपने उसे याद करने की कोशिश किए? जो बात हमारे मन में गहराई से उतर जाती है, वह हमारे साथ चलती है। परमेश्वर का वचन भी ऐसा ही हो सकता है। जब वह हमारे मन में बस जाता है, तो मुश्किल घड़ी में वही सबसे पहले हमारी मदद के लिए सामने आता है। मन ही जीवन का केंद्र है नीतिवचन 4:23 में लिखा है, "अपने मन की रखवाली सब से अधिक करना, क्योंकि जीवन का मूल वहीं से निकलता है।" हमारे विचार, हमारे फैसले और हमारा चरित्र, सब मन से ही बनते हैं। इसलिए सवाल यह नहीं है कि हम वचन पढ़ते हैं या नहीं, बल्कि यह है कि वह हमारे मन में टिकता है या नहीं। मरियम का उदाहरण इसे सुंदर तरीके से दिखाता है। लूका 2:19 के अनुसार, जब चरवाहों ने यीशु के जन्म की बातें बताईं, तो मरियम ने ये सब बातें अपने मन में रखीं और उन पर सोचती रही। उसने हर बात को तुरंत भुलाया नहीं, बल्कि उसे संजोया। आत्मिक जीवन की नींव अक्सर ऐसी ही चुप्पी और गहराई में बनती है। वचन मन में रहे तो क्या बदलता है? प्रल...