पौलुस का 13वां और अंतिम पत्र - 2 तीमुथियुस: मौत से पहले एक पिता की आखिरी वसीयत (2 Timothy 4:6-8)
"मैंने अच्छी कुश्ती लड़ी, मैंने अपनी दौड़ पूरी की, मैंने विश्वास को बनाए रखा है।" - (2 तीमुथियुस 4:7) जंजीरों में बंधा बूढ़ा पौलुस ठंडी जेल में अपना आखिरी पत्र लिख रहा है - यही 2 तीमुथियुस है, एक मरते हुए पिता की जीवित वसीयत। 1. पौलुस का तेरहवाँ पत्र कौन सा है? परिचय: लगभग 67-68 ईस्वी, रोम की ममर्टाइन जेल, सर्दी, मौत सामने - यह पत्र स्याही से नहीं, आंसुओं से लिखा है। यह पौलुस का तेरहवाँ और अन्तिम पत्र है - 2 तीमुथियुस का पत्र। पिछले बारह पत्र थिस्सलुनीके (दो), गलातिया, कुरिन्थुस (दो), रोम, इफिसुस, फिलिप्पी, कुलुस्से, फिलेमोन, 1 तीमुथियुस और तीतुस को गए थे। पौलुस का 13वां और अंतिम पत्र 2 तीमुथियुस रोम की ठंडी कालकोठरी से लिखा गया था। जहाँ वह शेर के मुंह से बचाया गया पर अब मृत्यु तैयार थी। जानिए इस पत्र के 4 अध्यायों में छुपे एक आत्मिक पिता के आखिरी संदेश। यह पौलुस का सबसे अन्तिम पत्र माना जाता है , लगभग ई. 64-67 में, दूसरी बार रोम की कैद से लिखा गया, इस बार बहुत कठोर हालत में। पहली कैद में वह किराए के घर में रह सकता था (प्रेरितों 28:30), पर अब वह खुद को "एक ...