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भ्रांति - यीशु के भारत आने संबंधित, रोजा बल, भविष्य पुराण और नोतोविच डायरी का वैज्ञानिक खंडन

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प्रभु यीशु के भारत आने की परिकल्पना केवल काल्पनिक निकली? विगत कुछ वर्षो से इस परिकल्पना को बहुत अधिक प्रचार-प्रसार मिल रहा है कि मसीह क्रूस की मृत्यु से बचकर अपनी माता मरियम तथा शिष्य यूहन्ना के साथ भारत चले आए थे और शेष जीवन यहीं व्यतीत किया। इस परिकल्पना के अनुसार मृत्यु के पश्चात् यीशु मसीह को श्रीनगर के रोजबल में दफनाया गया और यह कब्र आज तक है। प्रमाणस्वरुप भविष्य पुराण में वर्णित उस घटना को प्रस्तुत किया जाता है जिसमें हिमालय पर्वत प्रदेश में श्वेत वस्त्र धारी महर्षि ईसा, राजा शालिवाहन से मिलकर कहते है. "मैं म्लेच्छ देश में कुंवारी कन्या से उत्पन्न परमेश्वर का पुत्र हूं सत्य, प्रेम तथा करुणा मेरा धर्म हैं। "इस परिकल्पना की सहायतार्थ कुछ विद्वान रुसी यात्री निकोलस नेलोविच द्वारा 1887 में लददाख भ्रमण की डायरी प्रस्तुत करते हैं जिसके अनुसार उतर भारत में मसीह के आने के प्रमाण पाये जाते हैं। निकोलस तथा उसके पश्चात् कलकता के स्वामी अभेदानन्द लद्दाख स्थित, प्रमुख मठ हेमिग्वें पहुंचे तो प्रधान लामा ने प्राचान पाण्डुलिपियों में से पढ़कर सुनाया कि यीशु बुध्दावतार है, समस्त लामाओं ...

आदम को परमेश्वर ने क्या क्या दिया? उत्पत्ति 1-2 में आदम को मिली अद्भुत आशीषें जो आज भी आपके पास हैं।

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अदन की वाटिका में परमेश्वर पिता आदम को आशीष दे रहे हैं - हाथ सिर पर, एक हाथ में महिमा का मुकुट, दूसरे में आशीष - आदम घुटने पर आशीष की लपेट (स्क्रॉल) पकड़े है "फूलो फलो", पास में काम (पौधे), अधिकार (लाठी), पशु, पक्षी, सुंदर वृक्ष - यही आशीषें जो परमेश्वर ने आदम को दीं। आदम की स्रष्टि उत्पत्ति 1: 27; उत्पत्ति 2:4-25 तब परमेश्‍वर ने मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार उत्‍पन्‍न किया, अपने ही स्वरूप के अनुसार परमेश्‍वर ने उसको उत्‍पन्‍न किया; नर और नारी करके उसने मनुष्यों की सृष्टि की। (मत्ती 19:4, मर. 10:6, प्रेरि. 17:29, 1 कुरि. 11:7, कुलु. 3:10,1, तीमु. 2:13) आदम को बनाए जाने का उद्देश्य (उत्पत्ति 1:26,28) फिर परमेश्‍वर ने कहा, "हम मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार अपनी समानता में बनाएँ; और वे समुद्र की मछलियों, और आकाश के पक्षियों, और घरेलू पशुओं, और सारी पृथ्वी पर, और सब रेंगनेवाले जन्तुओं पर जो पृथ्वी पर रेंगते हैं, अधिकार रखें।" और परमेश्‍वर ने उनको आशीष दी; और उनसे कहा, "फूलो-फलो, और पृथ्वी में भर जाओ, और उसको अपने वश में कर लो; और समुंद्र की मछलियों, तथा आकाश ...