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पौलुस का 6वां पत्र रोमियों: विश्वास से धर्मी - बाइबल का सबसे गहरा धर्मशास्त्र (रोमि 1:17)

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पौलुस तराजू के सामने लिख रहा है - एक तरफ मनुष्य का पाप, दूसरी तरफ परमेश्वर की धार्मिकता। पीछे रोम का कोलोसियम और फोरम - दुनिया की राजधानी में सुसमाचार का न्याय का ऐलान। दीवार पर लिखा है FIDES (विश्वास) और IVSTITIA (धार्मिकता)। "क्योंकि मैं सुसमाचार से नहीं लजाता, इसलिए कि वह हर एक विश्वास करने वाले के लिये परमेश्वर की सामर्थ्य है।" - रोमियों 1:16  1. पौलुस का छठा पत्र कौन सा है? पौलुस का छठा पत्र है - रोमियों का पत्र। इसे लगभग ई. 57 में कुरिन्थुस से लिखा गया माना जाता है। इस श्रृंखला के पिछले पाँच पत्र थिस्सलुनीके (दो), गलातिया और कुरिन्थुस (दो) को गए थे। यह सबसे विशेष है क्योंकि पहले पाँच पत्र उन कलीसियाओं को लिखे गए थे जिन्हें पौलुस जानता था और जिनमें से कई उसने खुद शुरू की थीं। पर रोम की कलीसिया को पौलुस ने शुरू नहीं किया था, और वह तब तक वहाँ गया भी नहीं था (1:10-13)। रोम दुनिया की राजधानी था। वहाँ विश्वासी घरों में मिलते थे, और यह इसी पत्र में साफ लिखा है। पौलुस अक्विला और प्रिस्का को नमस्कार भेजता है और "उनके घर की कलीसिया" को भी (16:3-5)। आगे और भी सम...

पौलुस का 3रा पत्र गलातियों: व्यवस्था या अनुग्रह? सुसमाचार पर खतना गैंग का हमला और पौलुस का धमाका (गला 1:8)

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गुस्से में पौलुस, टूटी हुई व्यवस्था की पट्टियां, टूटी जंजीरें, पत्र में आग - संदेश: "व्यवस्था से नहीं, विश्वास से धर्मी।" यही गलातियों की आग है। मुख्य वचन:  "मसीह ने स्वतंत्रता के लिये हमें स्वतंत्र किया है; इसलिये स्थिर रहो और दासत्व के जूए में फिर न जुतो।" - गलातियों 5:1,  गलातियों 1:8 और 5:1"परन्तु यदि हम या स्वर्ग से कोई दूत भी... उस सुसमाचार को छोड़ दूसरा सुसमाचार तुम्हें सुनाए, तो श्रापित हो" "मसीह ने स्वतंत्रता के लिये हमें स्वतंत्र किया है" परिचय: गलातिया - आज का तुर्की, पौलुस ने पहली मिशन यात्रा में लुस्त्रा, दिरबे, इकुनियुम में कलीसिया बनाई (प्रेरित 13-14)। पौलुस गया, पीछे से झूठे भाई आ गए - "खतना कराओ, मूसा की व्यवस्था मानो"। पौलुस ने अपने हाथ से बड़े अक्षरों में लिखा (6:11)। 1. पौलुस का तीसरा पत्र कौन सा है? पौलुस का तीसरा पत्र है - गलातियों का पत्र। पहले दो पत्र थिस्सलुनीके को गए थे। (इस पत्र के लिखे जाने का ठीक समय विद्वानों में विवादित है। कुछ इसे ई. 48-49 का मानते हैं, कुछ 50 के दशक के मध्य का। हमारी श्रृंखला में इसे क...