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पौलुस का 5वां पत्र 2 कुरिन्थियों: आँसुओं से लिखा पत्र - सेवकाई में दुःख और महिमा (2 कुरि 4:17)

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पौलुस की आँखों में आँसू, स्याही बिखरी हुई, पीछे कुरिन्थ शहर - वही शहर जिसने उसे दुख दिया, पर वह फिर भी रो-रोकर लिख रहा है। यही 2 कुरिन्थियों का दिल है। परिचय: लगभग 55-56 ईस्वी, मकिदुनिया से, तीतुस के द्वारा भेजा। यह पौलुस का चौथा पत्र है कुरिन्थ को (एक खो गया - 1 कुरि 5:9, दूसरा कठोर पत्र - 2 कुरि 2:4)। पौलुस टूटा हुआ था। मुख्य वचन:  "उसने मुझ से कहा, 'मेरा अनुग्रह तेरे लिये बहुत है, क्योंकि मेरी सामर्थ्य निर्बलता में सिद्ध होती है।'" - 2 कुरिन्थियों 12:9, "परन्तु हमारे पास यह धन मिट्टी के बरतनों में रखा है, कि यह असीम सामर्थ्य हमारी नहीं, वरन परमेश्वर की ओर से ठहरे" - 2 कुरिन्थियों 4:7, 1. पौलुस का पाँचवाँ पत्र कौन सा है? पौलुस का पाँचवाँ पत्र है - 2 कुरिन्थियों का पत्र। इसे लगभग ई. 55-56 में मकिदुनिया से लिखा गया माना जाता है। पहले चार पत्र थिस्सलुनीके (दो), गलातिया और कुरिन्थुस (पहला) को गए थे। यह पत्र पौलुस के सबसे व्यक्तिगत पत्रों में से एक है, क्योंकि इसमें उसका हृदय खुलकर सामने आता है। पहले पत्र के बाद कुरिन्थुस की कलीसिया से रिश्ता बिगड़ गया था।...