महामारी काल में कलीसिया की भूमिका: जब चर्च बंद थे, तब असली कलीसिया जागी थी।
कोरोना वायरस में जिस तरह से हम रहते है, चलते हैं और हमारे रहन सहन का अस्तित्व है, सब कुछ बदल दिया है। (प्रेरितों के काम 17:28)। राजनीति, शासन, प्रशासन, न्यायपालिका, मीडिया, शिक्षा प्रणाली, स्वास्थ्य प्रणाली, हमारे काम करने और परिवार का समय बिताने का तरीका, यहां तक कि हमारे खाने पीने और हम अपने मित्रों के साथ कैसे व्यवहार करते हैं, सभी में भारी बदलाव आया है। यह समझने के लिए कि ‘‘चर्च युग’का अन्त का समय आ गया है और अब परमेश्वर लोगों के दिलों और घर वापसी कर रहें है इस के लिए हमें भविष्यवक्ता या बाइबल का ज्ञाता होने की आवश्यक्ता नहीं है। लड़ाइयां, बाढ़, अकाल और आग, तूफान, बवंडर, भूकंप और महामारी अतीत में भी हो चुके हैं, लेकिन वैश्विक स्तर पर पहले इस तादाद और इस कदर के नुक्सान के साथ कभी नहीं आये। क्या महामारी में कलीसिया सिर्फ Online Sermon तक सीमित थी? नहीं। जानिए कैसे प्रेरितों की कलीसिया ने अकाल में सेवा की (प्रेरित 11:29) और आज की कलीसिया को महामारी में क्या करना चाहिए - 5 प्रैक्टिकल भूमिकाएँ। हम जानते हैं कि सर्वनाश हमें घूर रहा है। पृथ्वी के चारों कोनों में प्रवासी इस्रायली लगभग 20...