क्रिसमस पर दोबारा गौर; Real Meaning Of Christmas Biblical View - Bible Me Christmas 25 December Kahan Se Aaya
इंटरनेट पर क्रिसमस के संदेश भरे पड़े हैं, पर सच यह है कि कोई नहीं जानता कि प्रभु यीशु ठीक किस दिन जन्मे। बाइबल हमें तारीख नहीं बताती, पर वह हमें जन्म के स्थान और उसके अर्थ के बारे में बहुत कुछ बताती है। आइए उस छोटे से नगर को देखें, जहाँ परमेश्वर ने अपने पुत्र को भेजा।
बेतलेहेम: रोटी का घर
बेतलेहेम नाम का अर्थ है "रोटी का घर"। मीका 5:2 में इस नगर का पूरा नाम "बेतलेहेम एप्राता" लिखा है। "एप्राता" शब्द फलदायी भूमि और अन्न से जुड़ा है। यह बड़ी सुंदर बात है कि मसीह, जो स्वयं जीवन की रोटी है (यूहन्ना 6:35), उस नगर में जन्मे जिसका नाम ही "रोटी का घर" है। यीशु ने कहा, "जीवन की रोटी मैं हूँ" (यूहन्ना 6:35), और दाखरस को उन्होंने अपने लहू का प्रतीक बनाया (लूका 22:19-20)। बेतलेहेम में जन्म लेकर वे रोटी और दाखरस के रूप में अपने लोगों को पोषण देने आए।
बेतलेहेम पर्वों के समय बलिदान के लिए मेमने पालने के लिए भी जाना जाता था। यहूदी परंपरा (मिशना, शेकालिम 7:4) बताती है कि मंदिर के बलिदान के लिए यहाँ के चरवाहे मेमने पालते थे। कई तीर्थयात्री यरूशलेम के मंदिर के बाज़ार में ठगे जाने के डर से बेतलेहेम तक, लगभग 8 किलोमीटर, पैदल जाकर चरवाहों से सीधे मेमने खरीदना पसंद करते थे।
चरवाहे: मसीह के जन्म का पहला संदेश
गौर करने की बात यह है कि मसीह के जन्म की खुशखबरी सबसे पहले चरवाहों ने सुनी (लूका 2:8-20)। स्वर्गदूत ने कहा, "आज दाऊद के नगर में तुम्हारे लिए एक उद्धारकर्ता जन्मा है, जो मसीह प्रभु है" (लूका 2:11)। ये चरवाहे समाज में साधारण लोग थे, न कि धनी या प्रतिष्ठित। वे फैंसी कपड़े पहनकर नहीं, बल्कि अपने खुरदरे कपड़ों में आए होंगे। यह भी संभव है कि वे अपने साथ एक मेमना भेंट के रूप में लाए हों, क्योंकि वे उसी नगर के मेमने पालते थे, पर पवित्रशास्त्र इसके बारे में चुप है। जो भी हो, परमेश्वर ने अपने सबसे बड़े संदेश के लिए साधारण और दीन लोगों को चुना।
गौशाला या चरनी?
बहुत से मसीही सोचते हैं कि यीशु एक गौशाला में जन्मे, पर पवित्रशास्त्र में कहीं भी "गौशाला" का उल्लेख नहीं है। लूका 2:7 केवल इतना कहता है कि उन्हें "चरनी में लिटाया"। यूनानी शब्द फाटने का अर्थ है पशुओं के खाने का लकड़ी या पत्थर का डब्बा। यह हो सकता है कि जन्म किसी घर, सराय या गुफा में हुआ हो, पर यह सिर्फ अनुमान है।
कुछ विद्वानों का मत है कि यीशु का जन्म मिलाप वाले तंबू के पर्व (सुक्कोत) के दौरान हुआ। यह पर्व इस्राएल के जंगल के चालीस वर्षों की याद में अस्थायी झोपड़ियों में मनाया जाता है। यह एक विचार है, जिसे हर कोई स्वीकार नहीं करता, पर यह इस बात की याद दिलाता है कि परमेश्वर अपने लोगों के बीच डेरा डालने आया। यूहन्ना 1:14 कहता है, "वचन देहधारी हुआ, और हमारे बीच में डेरा किया।"
यीशु का नाम "इम्मानुएल" रखा जाना था, जिसका अर्थ है "परमेश्वर हमारे साथ" (यशायाह 7:14; मत्ती 1:23)। यही उसके आने का सबसे बड़ा अर्थ है।
ज्योतिषी: यात्रा और हेरोदेस का क्रोध
मत्ती 2 के अनुसार पूर्व के ज्योतिषी यीशु के दर्शन के लिए आए। ये बाबुल के इलाके से आए थे, जो लगभग 900 से 1000 किलोमीटर दूर है, और ऊँटों पर यह यात्रा कई महीनों में पूरी हुई होगी। इसलिए यह संभव है कि जब वे पहुँचे, तब यीशु पहले से शिशु थे, नवजात नहीं (मत्ती 2:11 में "बालक" लिखा है, "नवजात" नहीं)।
जब हेरोदेस को पता चला कि ज्योतिषियों ने उसे धोखा दिया है, तो उसने बेतलेहेम के दो वर्ष और उससे छोटे सभी लड़कों को मारने का आदेश दिया (मत्ती 2:16)। यह अत्याचार का भयानक काम था। मत्ती 2:17-18 इसे यिर्मयाह 31:15 से जोड़ता है: "रामा में एक शब्द सुनाई दिया, रोना और बड़ा विलाप... राहेल अपने बालकों के लिये रोती है, और शान्ति नहीं चाहती, क्योंकि वे रहे ही नहीं।" रामा बेतलेहेम के उत्तर में है। राहेल की कब्र की पारंपरिक जगह बेतलेहेम के निकट मानी जाती है (उत्पत्ति 35:19)। इस प्रकार बेतलेहेम के शोक का चित्र राहेल के शोक से जुड़ा है।
बाबुल का तारा: एक दिलचस्प अनुमान
कुछ लोग यह सुझाव देते हैं कि बाबुल के ज्योतिषियों की पुस्तकों में इस्राएल के किसी राजा के जन्म की ओर संकेत करने वाले तारे का उल्लेख था, जो यहूदी शास्त्रों में नहीं था। यह संभव है कि दानियेल, जिसे राजा नबूकदनेस्सर ने बाबुल के बुद्धिमानों का प्रमुख बनाया था (दानियेल 2:48), के प्रभाव से ये विचार पूर्वी ज्ञान में पहुँचे हों। पर यह एक अनुमान है, पवित्रशास्त्र इस बात की पुष्टि नहीं करता।
तीन ज्योतिषी या अधिक?
लोग आम तौर पर मानते हैं कि तीन ज्योतिषी आए थे, क्योंकि तीन उपहार दिए गए: सोना, लोबान और गंधरस (मत्ती 2:11)। पर पवित्रशास्त्र ज्योतिषियों की संख्या नहीं बताता। इतनी लंबी यात्रा में कई और लोग भी साथ रहे होंगे। इसलिए संख्या "तीन" एक परंपरा है, तथ्य नहीं।
आज का क्रिसमस और सच्ची सादगी
आज जब हम क्रिसमस को भव्य आयोजनों, सजावट, भोजन और शोर-शराबे के साथ मनाते हैं, तो यह उस गरीब बढ़ई के बेटे के सादे जन्म से बहुत दूर लगता है। परमेश्वर का पुत्र एक साधारण परिवार में, दीन चरवाहों के बीच, और एक छोटे से नगर में आया। उसने अपनी महिमा को छिपाकर हमारे बीच जगह बनाई (फिलिप्पियों 2:6-7)।
इसलिए यह समय उत्सव के साथ-साथ आत्म-परीक्षण का भी है। क्या हमारा क्रिसमस उन लोगों तक पहुँचता है जो अंधकार और मृत्यु की छाया में बैठे हैं? यीशु का जन्म इसलिए हुआ कि वह "अंधकार में बैठे लोगों पर प्रकाश डाले" (लूका 1:79)। हम उसके प्रकाश को उन घरों तक ले जाएँ जहाँ दुख, गरीबी और अकेलापन है।
एक प्रार्थना
हे प्रभु यीशु, तू रोटी का घर बेतलेहेम में जन्मा, और चरवाहों को पहली खुशखबरी दी। हमें सादगी, नम्रता और सच्चे प्रेम से तेरा जन्म मनाना सिखा। जो अंधकार और मृत्यु की छाया में बैठे हैं, उन तक अपना प्रकाश पहुँचा, और हमें उनके लिए प्रकाश बना। इम्मानुएल, परमेश्वर हमारे साथ, तेरे नाम में, आमीन।
शालोम,

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