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पौलुस का 10वां पत्र फिलेमोन: दास उनेसीमुस कैसे भाई बना? मसीह में क्षमा की सबसे बड़ी कहानी

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"यदि उसने तेरी कुछ हानि की हो, या उस पर तेरा कुछ आता हो, तो मेरे नाम पर लिख ले।" - (फिलेमोन 18),   पौलुस का दसवाँ पत्र कौन सा है? यह पौलुस का दसवाँ पत्र है - फिलेमोन का पत्र। पिछले नौ पत्र थिस्सलुनीके (दो), गलातिया, कुरिन्थुस (दो), रोम, इफिसुस, फिलिप्पी और कुलुस्से को गए थे। परिचय: लगभग 60-62 ईस्वी, रोम की जेल, पौलुस के 4 जेल-पत्रों में से एक (इफिसियों, फिलिप्पियों, कुलुस्सियों, फिलेमोन)। कुल 1 अध्याय, 25 पद। मुख्य पात्र: फिलेमोन: कुलुस्से का धनी विश्वासी, घर की कलीसिया का अगुवा (पद 2), पौलुस का मित्र उनेसीमुस: नाम का अर्थ " लाभदायक" , पर काम अलाभदायक निकला। मालिक का पैसा लेकर भाग गया (पद 18), रोम में पौलुस से मिला। पौलुस: बूढ़ा, कैदी, पर मध्यस्थ कहानी का मोड़: उनेसीमुस रोम में मसीही बना - "जो पहले तेरे किसी काम का न था, पर अब तेरे और मेरे दोनों के काम का है" (पद 11)  पौलुस का अनुरोध: इसे दास की तरह नहीं, भाई की तरह ग्रहण कर (पद 16) सबसे बड़ा पद: "जो कुछ उसने तेरा बिगाड़ा है... मेरे खाते में लिख ले, मैं भर दूंगा" (पद 18-19) - बिल्कुल यीशु क...