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परमेश्वर को धन्यवाद का बलिदान चढ़ाना जीवन की सर्वोच्च आराधना - भजन संहिता 50:14

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“ आध्यात्मिक चिंतन श्रृंखला” “परमेश्वर को धन्यवाद ही का बलिदान चढ़ा, और परमप्रधान के लिये अपनी मन्नतें पूरी कर।” (भजन संहिता 50:14) यह वचन केवल शब्दों की पुकार नहीं, बल्कि आत्मा की गहराई से निकला हुआ एक समर्पण है - ऐसा समर्पण जो सम्पूर्ण जीवन को आराधना का पात्र बना देता है। धन्यवाद केवल एक भावना नहीं, बल्कि हृदय की सच्ची भाषा है - वह दिव्य अभिव्यक्ति जिसके द्वारा मनुष्य अपने सृष्टिकर्ता के प्रति कृतज्ञता, प्रेम और आदर अर्पित करता है। धन्यवाद का बलिदान वह अमूल्य भेंट है जो मन, वचन और कर्म - तीनों से परमेश्वर की वेदी पर चढ़ती है। यह वह बलिदान है जो किसी पशु या वस्तु से नहीं, बल्कि हमारे भीतर के भाव और विश्वास से उत्पन्न होता है। यही वह भेंट है जो प्रभु को सबसे अधिक प्रिय है, क्योंकि यह हृदय की सच्चाई और विनम्रता से प्रस्फुटित होती है। “सब बातों में हमारे प्रभु यीशु मसीह के नाम से परम पिता परमेश्वर का धन्यवाद करते रहो।” (इफिसियों 5:20) यह वचन हमें सिखाता है कि धन्यवाद केवल परिस्थितियों पर निर्भर नहीं होना चाहिए, बल्कि यह हमारे विश्वास का स्वभाव होना चाहिए । एक कृतज्ञ हृदय हर परिस्थिति में...

इस्टर संबंधित भ्रांति - प्रेम, युद्ध और उर्वरता की देवी - प्रेरितों के काम 12:4

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महारानी ई इश्टर समय: लगभग 1800-1750 BC, बेबीलोन सभ्यता की।  कौन है ये? मेसोपोटामिया की देवी - इश्तार / इनन्ना या अधोलोक की देवी एरेश्किगल, जी हाँ, मेरा मतलब महारानी इश्टर से ही है, इस्तेर से नहीं। बेबिलॅन की देवी इश्टर के नाम पर मसीहियों का सबसे महत्वपूर्ण पर्व इस्टर है। पूरी बाइबिल में सिर्फ एक जगह इस्टर शब्द आया है, यानी प्रेरितों 12:4 में - वह भी सिर्फ में, वह मूल यूनानी शब्द (यास्का) का गलत अनुवाद है। इसका सहीं अनुवाद Passover (फसह का पर्व) होना चाहिए था, जो ASV समेत भारतीय भाषाओँ में अनुवादित बाइबिल में पाया जाता हैं। प्रभु यीशु के जी उठने का पर्व मनाने का नये नियम में कहीं कोई जिक्र नहीं है। यहूदी मसीहियों ने इसे फसह के पर्व से जोड़ दिया और यहूदी महीने निसान के 14 वें दिन मनाना शुरु कर दिया। चाहे वह जिस किसी दिन पडता। मगर गैर-यहूदी मसीही इसे प्रभु यीशु के दिन रविवार को मनाने लगे नाइसिया की महासभा (325ई.) के बाद यह पर्व 21 मार्च के बाद की पूर्णिमा के बाद आने वाले पहले रविवार को मनाया जाने लगा यह हमेशा 22 मार्च और 25 अप्रैल के बीच पड़ता हैं। पूर्वी ऑर्थोडॉक्स कलीसियाय इस पर्व क...

बाइबल में मनुष्य के बुरे अवगुणों के बारे में विस्तार से बताया गया है। (मत्ती 23:12, 1 कुरिन्थियों 13:4)

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बाइबल में अहंकार को एक बड़ा अवगुण बताया गया है। -    (मत्ती 23:12, 1 कुरिन्थियों 13:4) लालच (मत्ती 6:24, 1 तीमुथियुस 6:10): लालच को बाइबल में एक बड़ा अवगुण बताया गया है।  क्रोध (मत्ती 5:22, इफिसियों 4:26): क्रोध को बाइबल में एक बड़ा अवगुण बताया गया है। ईर्ष्या (मत्ती 27:18, 1 कुरिन्थियों 13:4): ईर्ष्या को बाइबल में एक बड़ा अवगुण बताया गया है। असत्य (मत्ती 5:33, कुलुस्सियों 3:9): असत्य को बाइबल में एक बड़ा अवगुण बताया गया है। चोरी (मत्ती 19:18, 1 कुरिन्थियों 6:10): चोरी को बाइबल में एक बड़ा अवगुण बताया गया है। व्यभिचार (मत्ती 5:27, 1 कुरिन्थियों 6:18): व्यभिचार को बाइबल में एक बड़ा अवगुण बताया गया है। हत्या (मत्ती 5:21, 1 यूहन्ना 3:15): हत्या को बाइबल में एक बड़ा अवगुण बताया गया है। मूर्खता (मत्ती 7:26, 1 कुरिन्थियों 3:19): मूर्खता को बाइबल में एक बड़ा अवगुण बताया गया है। अन्याय (मत्ती 23:23, याकूब 2:13): अन्याय को बाइबल में एक बड़ा अवगुण बताया गया है। अभिमान (1 कुरिन्थियों 13:4, याकूब 4:6): अभिमान को बाइबल में एक बड़ा अवगुण बताया गया है। असंतोष (मत्ती 6:24, 1 तीमुथ...

बाइबल में वर्णित देवी - देवता उत्पत्ति 31ः26-55 - गृह देवता, पलिश्तियों का दागोन देवता।

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बाईबल में वर्णित देवी - देवता (1) उत्पत्ति 31ः26-55 - गृह देवता, तब लाबान याकूब से कहने लगा, "तूने यह क्या किया, कि मेरे पास से चोरी से चला आया, और मेरी बेटियों को ऐसा ले आया, जैसा कोई तलवार के बल से बन्दी बनाई गई हों ? तू क्यों चुपके से भाग आया, और मुझसे बिना कुछ कहे मेरे पास से चोरी से चला आया; नहीं तो मैं तुझे आनन्द के साथ मृदंग और वीणा बजवाते, और गीत गवाते विदा करता ? तूने तो मुझे अपने बेटे-बेटियों को चूमने तक न दिया? तूने मूर्खता की है। तुम लोगों की हानि करने की शक्ति मेरे हाथ में तो है; पर तुम्हारे पिता के परमेश्‍वर ने मुझसे बीती हुई रात में कहा, 'सावधान रह, याकूब से न तो भला कहना और न बुरा।' भला, अब तू अपने पिता के घर का बड़ा अभिलाषी होकर चला आया तो चला आया, पर मेरे देवताओं को तू क्यों चुरा ले आया है ?"  याकूब ने लाबान को उत्तर दिया, "मैं यह सोचकर डर गया था कि कहीं तू अपनी बेटियों को मुझसे छीन न ले। जिस किसी के पास तू अपने देवताओं को पाए , वह जीवित न बचेगा। मेरे पास तेरा जो कुछ निकले, उसे भाई-बन्धुओं के सामने पहचानकर ले-ले।" क्योंकि याकूब न जानता था ...

THE MODERN CHURCH IS CONSTANTINES GIFT

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Despite severe battering, the early Ekklesia capped a spectacular performance for 300 years without church buildings, clergy, musical instruments, weekly services, Christmas, Easter, Good Friday or regular tithing. Emperor Constantine of Rome, a hybrid Christian, who also venerated the sun god, introduced most of these extra-biblical traditions, giving birth to a completely illegitimate church. HOW DID WEEKLY WORSHIP START? After the first cathedral was built in Rome in 322, Sunday was declared a day of worship. People used to get drunk on Saturday night anyway, so everyone thought it was a good idea. Unfortunately, the six other days, when the believers used to meet in each other’s homes were lost. Meanwhile, the heathen continued to worship every day of the week. Each day was dedicated to different gods - Monday was dedicated to the moon, Tuesday to “Tiu,” Wednesday was dedicated to Woden, Thursday was given to Thor, Friday to Frigg and Saturn was worshipped on Saturday. In India, va...