वचन पर मनन कैसे करें? एक सरल और गहरा तरीका
"धन्य है वह मनुष्य जिसका आनंद यहोवा की व्यवस्था में रहता है।" क्या आपने कभी किसी पद को पढ़ा, आगे बढ़ गए, और बाद में वह पद अचानक याद आया जब आपको उसकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत थी? यह अनुभव बताता है कि पढ़ना एक बात है, और मनन करना दूसरी। पढ़ना हमें जानकारी देता है, पर मनन उस जानकारी को जीवन का हिस्सा बनाता है। पढ़ना और मनन करना एक जैसे नहीं हैं बहुत से लोग रोज़ बाइबल खोलते हैं, कुछ अध्याय पढ़ते हैं, और फिर दिन आगे बढ़ जाता है। इसमें कोई बुराई नहीं है, पर यदि हम वचन को केवल पढ़कर छोड़ देते हैं, तो वह अक्सर हमारे मन की सतह पर ही रह जाता है। भजन 1:2 में लिखा है कि धर्मी व्यक्ति परमेश्वर की व्यवस्था में आनंद पाता है और उस पर दिन-रात ध्यान करता है। यहां "ध्यान" शब्द का भाव बार-बार सोचने, गुनगुनाने और गहराई से उस पर विचार करने का है। यही मनन है। मनन के चार सरल कदम 1. शांत जगह और समय चुनें। मनन के लिए भीड़ और शोर से दूर थोड़ा समय चाहिए। सुबह की शुरुआत या सोने से पहले का समय अक्सर सबसे अच्छा रहता है। पांच मिनट की शांति भी बहुत फर्क डालती है। 2. एक ही पद को धीरे-धीरे पढ़ें...