प्रेरितों 2:46 - पहली कलीसिया का सीक्रेट: रोज एक मन, मंदिर में + घर-घर रोटी तोड़ना - आनंद और सिधाई
पीछे यरूशलेम मंदिर जहाँ बड़ी सभा होती थी, आगे घर के आंगन में छोटी टेबल पर रोटी तोड़ते हुए आनंद से - वही पहली कलीसिया का मॉडल। चेहरों पर सिधाई और आनंद दोनों हैं! मुख्य वचन: " और प्रतिदिन एक मन होकर मन्दिर में इकट्ठे होते थे , और घर-घर रोटी तोड़ते हुए आनन्द और मन की सिधाई से भोजन किया करते थे ।" (प्रेरितों के काम 2:46 ) परिचय: पिन्तेकुस्त के बाद पहला दिन - 120 से 3120 हो गए। न कोई बिल्डिंग, न बजट, पर ऐसी आग जो आज नहीं दिखती। लूका लिखता है, उनका Lifestyle 4 शब्दों में। "और प्रतिदिन एक मन होकर मन्दिर में इकट्ठे होते थे, और घर-घर रोटी तोड़ते हुए आनन्द और मन की सिधाई से भोजन किया करते थे" - प्रेरितों 2:46 में 3000 लोगों की पहली कलीसिया रोज कैसे जीती थी? मंदिर + घर, बड़ी सभा + छोटी संगति, यही आज की कलीसिया भूली है। आज का संदेश: परमेश्वर की सबसे बड़ी योजना आपकी चार दीवारों में है । प्रेरितों के काम 2 की कलीसिया दो जगह मिलती थी - मन्दिर में और घर-घर में । मन्दिर में वे भीड़ में मिलते थे , पर घर में वे परिवार बनते थे । आज परमेश्वर आपसे कह रहा है - तुम्हारा घर सिर्फ सोने ...