Posts

विश्वास जो एक ही बार पवित्र लोगों को सौंपा गया

Image
  "हे प्रियों, जब मैं तुम्हें हमारे सामान्य उद्धार के विषय में लिखने का पूरा यत्न कर रहा था, तो मुझे आवश्यक जान पड़ा कि तुम्हें यह लिखकर समझाऊं कि उस विश्वास के लिये पूरा यत्न करो, जो एक ही बार पवित्र लोगों को सौंपा गया था।" (यहूदा 1:3) यह पद आज की कलीसिया के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण है। आइए इसे बाइबल के सम्पूर्ण संदर्भ में समझते हैं। यहाँ "विश्वास" (The Faith) का अर्थ केवल व्यक्तिगत विश्वास (Personal Faith) नहीं है। बाइबल में दो प्रकार के विश्वास दिखाई देते हैं। 1. परमेश्वर पर व्यक्तिगत विश्वास (Faith in God) यह वह विश्वास है जिससे मनुष्य उद्धार पाता है।  "क्योंकि विश्वास के द्वारा अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है।" (इफिसियों 2:8) यह प्रत्येक व्यक्ति का व्यक्तिगत विश्वास है। 2. विश्वास (The Faith)  यहूदा 1:3 में इसी की बात हो रही है। यह सम्पूर्ण मसीही शिक्षा (Christian Doctrine) है जो प्रेरितों द्वारा परमेश्वर से प्राप्त होकर कलीसिया को दी गई। इसमें सम्मिलित हैं :-  सुसमाचार प्रभु यीशु का व्यक्तित्व उसका क्रूस पुनरुत्थान पश्चाताप...

Modern Church Model vs New Testament Ekklesia Model

Image
If you have a sacred building called a church, a salaried pastor, sermons, musical instruments, Sunday worship services, and tithing, then you are not following the New Testament model of the church. The primary function of the church is to teach one another so that the Kingdom of God may grow and multiply. The fundamental difference is that while the modern church gathers to worship God through songs, the New Testament Ekklesia gathered to teach and edify one another (1 Corinthians 14:26–32). While the modern church often grows through transfer growth and reproduction, the New Testament Ekklesia grew and multiplied through the transformation of the lost and the despised. Likewise, while traditional churches often have fee-paying members who come to receive blessings, the New Testament church consists of voluntary Royal Priests who equip worthy disciples to advance the Kingdom of God (Ephesians 4:11–12). One Another: The New Testament strongly emphasizes mutual relationships and activi...

MEGA CHURCH TO META (BEYOND) CHURCH

Image
25 Steps to transit from being barren to a millionaire of souls. 1. Rewrite the job description of the professional clergy from that of a pulpit orator, sacrament dispenser and tithe gatherer, to that of a shepherd who feeds his flock to be healthy and reproducing, by encouraging them to practice the priesthood of all believers with authority to baptize, break bread and equip fishers of men. He must model a flat church structure wherein the flock submit to one another, pray one for another, serve one another, exhort, forgive and love each other. (John 13:34-35; Matthew18:21-22; Eph. 5:21) 2. Move from corporatized temples to gathering in simple organic houses of peace', which are biblically based, kingdom oriented, customizable, effective and free. 'God does not dwell in temples made with human hands'; rather He dwells in human hearts. You are the aroma of Christ and the fragrance of life among those rogues and rascals who are perishing. You are not there to peddle the word...

“विशाल कलीसिया से परे (उससे आगे) की कलीसिया की ओर”

Image
बांझ अवस्था से आत्माओं के करोड़पति बनने तक के 25 कदम 1. पेशेवर पादरियों के कार्य- विवरण को मंच के वक्ता, संस्कार बाँटने वाले और दशमांश इकट्ठा करने वाले के रूप से बदलकर ऐसे चरवाहे का बनाइए जो अपने झुंड को इस प्रकार पोषित करता है कि वे स्वस्थ और फलवन्त बनें, और उन्हें सभी विश्वासियों के याजकत्व का अभ्यास करने के लिए प्रोत्साहित करता है, जिसमें बपतिस्मा देने, रोटी तोड़ने और मनुष्यों के मछुवारे तैयार करने का अधिकार हो । उसे एक समतल कलीसिया संरचना का आदर्श प्रस्तुत करना चाहिए, जिसमें झुंड के लोग एक-दूसरे के अधीन रहते हैं, एक-दूसरे के लिए प्रार्थना करते हैं, एक-दूसरे की सेवा करते हैं, एक-दूसरे को उत्साहित करते हैं, एक-दूसरे को क्षमा करते हैं और एक-दूसरे से प्रेम रखते हैं । (यूहन्ना 13:34-35; मत्ती 18:21-22; इफि. 5:21)  2. कॉर्पोरेट ढंग से संचालित मंदिरों से निकलकर शांति के सरल और स्वाभाविक घरों में एकत्र होने की ओर बढ़िए, जो बाइबल पर आधारित, राज्य-केंद्रित, अनुकूलनीय, प्रभावी और स्वतंत्र हों । परमेश्वर मनुष्यों के हाथों से बनाए गए मंदिरों में नहीं रहता; बल्कि वह मनुष्यों के हृदयों में वा...

परमेश्वर को धन्यवाद का बलिदान चढ़ाना जीवन की सर्वोच्च आराधना

Image
“ आध्यात्मिक चिंतन श्रृंखला” “ परमेश्वर को धन्यवाद ही का बलिदान चढ़ा , और परमप्रधान के लिये अपनी मन्नतें पूरी कर ।” (भजन संहिता 50:14) यह वचन केवल शब्दों की पुकार नहीं , बल्कि आत्मा की गहराई से निकला हुआ एक समर्पण है - ऐसा समर्पण जो सम्पूर्ण जीवन को आराधना का पात्र बना देता है । धन्यवाद केवल एक भावना नहीं , बल्कि हृदय की सच्ची भाषा है - वह दिव्य अभिव्यक्ति जिसके द्वारा मनुष्य अपने सृष्टिकर्ता के प्रति कृतज्ञता , प्रेम और आदर अर्पित करता है । धन्यवाद का बलिदान वह अमूल्य भेंट है जो मन , वचन और कर्म - तीनों से परमेश्वर की वेदी पर चढ़ती है । यह वह बलिदान है जो किसी पशु या वस्तु से नहीं , बल्कि हमारे भीतर के भाव और विश्वास से उत्पन्न होता है । यही वह भेंट है जो प्रभु को सबसे अधिक प्रिय है , क्योंकि यह हृदय की सच्चाई और विनम्रता से प्रस्फुटित होती है । “ सब बातों में हमारे प्रभु यीशु मसीह के नाम से परम पिता परमेश्वर का धन्यवाद करते रहो ।” (इफिसियों 5:20) यह वचन हमें सिखाता है कि धन्यवाद केवल परिस्थितियों पर निर्भर नहीं होना चाहिए , बल्कि यह हमारे विश्वास का स्वभाव होना चाहिए । एक...

कलीसिया में प्राचीनों की भूमिका

Image
 अनेक प्राचीन (Plurality of Elders) नये नियम के समय में, उनके पास कोई वेतनभोगी पास्टर नहीं था, बल्कि सभी स्वयंसेवक प्राचीनों (Elders) का समूह होता था । पौलुस और बर्नाबास ने “हर कलीसिया में प्राचीन नियुक्त किए” (प्रेरितों के काम 14:23) । पौलुस ने तीतुस को निर्देश दिया कि “हर नगर में प्राचीन नियुक्त करो” (तीतुस 1:5) । एफिसुस (प्रेरितों के काम 20:17), पोंतुस, गलातिया, कप्पदूकिया, एशिया, और बिथिनिया (1 पतरस 1:1; 5:1-2) की कलीसियाओं में अनेक प्राचीन थे । पतरस स्वयं को भी एक प्राचीन कहता है । प्राचीन, बिशप, निरीक्षक और शासक ये शब्द एक-दूसरे के पर्याय हैं और एक ही पद को दर्शाते हैं । प्राचीन इस्राएलियों और अन्यजातियों दोनों में उपस्थित थे, जो न्याय का प्रशासन करते थे, व्यवस्था बनाए रखते थे और महत्वपूर्ण परिस्थितियों में राष्ट्र का नेतृत्व करते थे । स्वाभाविक रूप से, कठोर छँटाई के बावजूद, कुछ झूठे प्राचीन प्रकट होते थे जो भेड़ों के वस्त्र में भेड़िए निकलते थे, जो झुंड को नहीं बख्शते थे और अपने पीछे चेलों को खींच ले जाते थे । (प्रेरितों के काम 20:29-30)  प्राचीन की योग्यताएँ और कार्य...

आधुनिक चर्च मॉडल बनाम नए नियम की एक्लेसिया (Ekklesia) मॉडल

Image
परिचय:  आज संसार में दो प्रकार की कलीसियाई व्यवस्थाएँ स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं। एक ओर आधुनिक चर्च मॉडल है, जो अधिकतर संस्थागत, भवन-केन्द्रित और कार्यक्रम-आधारित व्यवस्था पर आधारित है। दूसरी ओर नए नियम की एक्लेसिया (Ekklesia) मॉडल है, जो प्रभु यीशु मसीह और प्रेरितों की शिक्षा पर आधारित जीवित, आत्मिक और सहभागितापूर्ण विश्वासियों का समुदाय है। यह तुलना किसी व्यक्ति या समूह की निन्दा के लिये नहीं, बल्कि बाइबल के प्रकाश में सत्य को समझने के लिये प्रस्तुत की जा रही है। यदि आपके पास एक पवित्र इमारत है जिसे चर्च कहा जाता है, एक वेतनभोगी पास्टर है, प्रवचन है, संगीत वाद्ययंत्र हैं, रविवार की आराधना सेवा और दशमांश (टिथिंग) आदि हैं, तो आप नए नियम (New Testament) की कलीसिया के मॉडल के अनुरूप नहीं हैं । क्योंकि कलीसिया का मुख्य कार्य एक-दूसरे को शिक्षा देना है ताकि परमेश्वर का राज्य बढ़े और गुणा हो । मूलभूत अंतर यह है कि जहाँ आधुनिक कलीसिया गीतों के द्वारा परमेश्वर की आराधना करने के लिए मिलती है, वहीं नये नियम की एक्लेसिया (Ecclesia) एक-दूसरे को शिक्षा देने के लिए मिलती थी (1 कुरिन्थियों 14:...