जब यीशु घर का मेहमान नहीं, मालिक बनता है: मेहमान यीशु जाता है, मालिक यीशु घर बदल देता है - प्रकाशितवाक्य 3:20
आज का
संदेश: बहुतों ने यीशु को घर में बुलाया, पर मालिक नहीं बनाया
प्रकाशितवाक्य 3:20 में यीशु बाहर खड़ा है। ध्यान दीजिए, वचन पापियों
के लिए नहीं, कलीसिया के लिए है। यीशु अपनी ही कलीसिया के
बाहर खड़ा खटखटा रहा है।
आज बहुत से मसीही
परिवारों में यीशु मेहमान है। रविवार को बुलाते हैं, प्रार्थना के समय बुलाते हैं, फिर अपने काम में लग
जाते हैं। पर परमेश्वर चाहता है कि यीशु मेहमान नहीं, इस घर
का मालिक बने। बहुत से घरों में यीशु सिर्फ रविवार का मेहमान है - आरती की तरह बुलाया, चाय पिलाई, भेज दिया। पर जब यीशु घर का मालिक बनता है तो सब बदल जाता है। मेहमान को एक कमरा देते हैं, मालिक को पूरे घर की चाबी। जानिए 5 फर्क - मेहमान यीशु से मालिक यीशु तक।
मेहमान
और मालिक में क्या फर्क है?
मेहमान को हम अपनी
सुविधा से बुलाते हैं। मालिक जो चाहे वो करता है।
जब
यीशु मालिक बनता है तो 3 चीजें बदलती हैं:
1.
निर्णय यीशु लेता है, हम नहीं, पहले हम पूछते
थे:- "मुझे क्या करना अच्छा लगता है?"
अब हम पूछते हैं - "यीशु को क्या अच्छा लगता है?" घर में टीवी क्या देखना है, बच्चों को क्या सिखाना
है, पैसों को कैसे इस्तेमाल करना है - हर फैसले के केंद्र
में यीशु होता है। 1 कुरिन्थियों 10:31 कहता है - "तुम जो कुछ भी करो, सब कुछ परमेश्वर की महिमा के लिये करो।"
2.
घर में सफाई होती है: जब
कोई नया मालिक घर खरीदता है, तो वह सबसे पहले कचरा बाहर
निकालता है। जब यीशु मालिक बनता है, तो वह घर से लड़ाई,
गाली, नशा, अश्लीलता,
मूर्तियाँ - सब बाहर निकालता है। प्रेरितों 19:19 में जब यीशु इफिसुस में मालिक बना, तो लोगों ने
अपने जादू-टोने की किताबें लाकर जला दीं। कीमत 50,000 चाँदी
के सिक्के थी। सच्चा उद्धार सस्ता नहीं होता।
3.
घर में भंडार खुलता है: मेहमान
खाली हाथ आता है, पर मालिक अपने भंडार के साथ आता
है। नीतिवचन 10:22 कहता है यहोवा की आशीष धन देती है। जब
यीशु सिर्फ मेहमान है तो आप अपनी ताकत से घर चलाते हैं। जब वह मालिक बनता है तो
वह अपने स्वर्गीय भंडार से आपका घर चलाता है - शांति, प्रावधान,
सुरक्षा, और संतानों की आशीष से।
आज
अपने आप से पूछें: क्या यीशु मेरे घर के ड्राइंग रूम तक ही
है,
या किचन, बेडरूम और तिजोरी तक भी उसका अधिकार
है?
आज की
प्रार्थना: प्रभु यीशु, मुझे क्षमा कर
कि अब तक मैंने तुझे सिर्फ मेहमान बनाकर रखा। आज मैं अपने घर की चाबी तेरे हाथ
में देता/देती हूँ। आज से तू इस घर का प्रभु और मालिक है। जो तुझे पसंद नहीं,
उसे मेरे घर से निकाल दे । जो तुझे पसंद है, वह
मेरे घर में स्थापित कर। यीशु के नाम में, आमीन।
आज की
घोषणा: आज अपने घर के हर कमरे में जाकर कहें -
"यीशु इस
घर का मालिक है! इस घर पर यीशु का राज्य है!"
आज का
काम:
1. आज अपने घर से एक ऐसी चीज निकाल दें जो यीशु को प्रसन्न नहीं करती।
2. आज अपने परिवार के साथ बैठकर तय करें कि इस घर का एक भी फैसला बिना
प्रार्थना के नहीं होगा।
शालोम,
- P. R. Jharbade

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