करवा चौथ की उत्पत्ति: क्या तम्मूज़ और सेमिरामिस से कोई संबंध है?
करवा चौथ और तम्मूज़: दावा, इतिहास और तथ्य
भूमिका
करवा चौथ भारत के करोड़ों घरों में श्रद्धा से मनाया जाने वाला पर्व है। हाल के वर्षों में सोशल मीडिया और कुछ धार्मिक प्रवचनों में यह दावा फैला है कि करवा चौथ का संबंध बाइबल में वर्णित तम्मूज़ के लिए महिलाओं के विलाप से है, और इसकी शुरुआत सेमिरामिस नामक रानी ने की थी। इस लेख में इस दावे को चार हिस्सों में परखा गया है: पर्व स्वयं क्या है, बाइबल में वास्तव में क्या लिखा है, इतिहास क्या बताता है, और दोनों के बीच संबंध जोड़ने के लिए किन प्रमाणों की ज़रूरत होगी।
क्या करवा चौथ का ज़िक्र बाइबल में है? जानिए यहेजकेल 8:14, तम्मूज़, सेमिरामिस और हिस्लोप के दावे की पड़ताल, और प्रमाण क्या कहते हैं। करवा चौथ बाइबल में, करवा चौथ की उत्पत्ति, तम्मूज़ कौन था, सेमिरामिस और तम्मूज़, The Two Babylons, करवा चौथ का इतिहास, करवा चौथ की कथा, यहेजकेल 8:14 का अर्थ।
1. करवा चौथ क्या है
नाम और समय। "करवा" का अर्थ मिट्टी का छोटा पात्र (घड़ा) है और "चौथ" का अर्थ चतुर्थी तिथि। यह व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को रखा जाता है, जो पूर्णिमांत पंचांग के अनुसार दिवाली से लगभग नौ-दस दिन पहले पड़ती है।
रीति-रिवाज।
- सुबह सूर्योदय से पहले सरगी खाई जाती है, जो परंपरागत रूप से सास द्वारा बहू को दी जाती है।
- दिन भर निर्जल या फलाहारी उपवास रखा जाता है।
- शाम को महिलाएँ सज-धजकर एकत्र होती हैं, करवा की पूजा और कथा-श्रवण करती हैं।
- चंद्रोदय के बाद छलनी से चंद्रमा और फिर पति को देखा जाता है, चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है, और पति के हाथ से जल पीकर व्रत खोला जाता है।
उद्देश्य। विवाहित महिलाएँ पति की लंबी आयु और दांपत्य सुख की कामना करती हैं। अविवाहित युवतियाँ भी कई जगह मनचाहे वर की कामना से व्रत रखती हैं।
प्रचलित क्षेत्र। मुख्यतः पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश। दक्षिण और पूर्वी भारत में यह पारंपरिक रूप से कम प्रचलित था और बीसवीं सदी में फिल्मों और मीडिया के कारण अधिक फैला।
2. करवा चौथ की कथाएँ
इस पर्व से जुड़ी कई कथाएँ हैं, और सभी भारतीय पात्रों और परिवेश की हैं।
- वीरावती की कथा: एक राजकुमारी वीरावती अपने सात भाइयों की इकलौती बहन थी। पहले करवा चौथ पर भूख से व्याकुल होने पर भाइयों ने छल से दीपक की रोशनी दिखाकर चंद्रोदय का भ्रम दिया और उसने व्रत तोड़ दिया। इसके बाद पति की मृत्यु हो गई। बाद में विधिपूर्वक व्रत करने पर पति पुनर्जीवित हुआ।
- करवा की कथा: करवा नामक पतिव्रता स्त्री ने अपने तप के बल पर यमराज को विवश करके मगरमच्छ से पति के प्राण बचाए।
- सत्यवान-सावित्री से मिलती भावना: पति के प्राण यमराज से लौटा लाने का भाव भारतीय परंपरा में पुराना है।
- द्रौपदी की कथा: कुछ लोक-कथाओं में कहा जाता है कि पांडवों के संकट में कृष्ण ने द्रौपदी को यह व्रत करने की सलाह दी।
यह ध्यान देने योग्य है कि इन कथाओं में न मेसोपोटामिया है, न तम्मूज़, न सेमिरामिस। कथाओं का वातावरण, पात्र और मूल्य भारतीय हैं।
3. करवा चौथ की उत्पत्ति पर विद्वानों के अनुमान
इस पर्व की सटीक उत्पत्ति निश्चित रूप से ज्ञात नहीं है। लोक-परंपराओं के अध्ययन में कुछ अनुमान लगाए जाते हैं, जो निश्चित तथ्य नहीं, सिर्फ़ संभावनाएँ हैं:
- कृषि से संबंध: यह समय रबी की बुवाई का है, और "करवा" में अनाज रखने की परंपरा से जोड़कर इसे कृषि-चक्र का उत्सव माना जाता है।
- सखी-भाव की परंपरा: पुरानी परंपरा में विवाहित स्त्रियाँ करवा आपस में बदलकर "धर्म-बहन" या सखी बनती थीं, जिससे नए ससुराल में स्त्री को सहारा मिलता था।
- सैनिकों की पत्नियाँ: कुछ लोग इसे उत्तर-पश्चिम भारत में युद्ध पर गए पतियों की सलामती की कामना से जोड़ते हैं।
- चंद्र और चतुर्थी की परंपरा: हिंदू परंपरा में चंद्रमा (चंद्र या सोम) की पूजा वैदिक काल से मिलती है, और चतुर्थी पर चंद्र-दर्शन तथा अर्घ्य की रीति अन्य व्रतों में भी है।
इन सभी अनुमानों की जड़ें भारत के भीतर हैं।
4. बाइबल में तम्मूज़
मूल पाठ। यहेजकेल 8:14 में नबी यहेजकेल को दर्शन में यरूशलेम के मंदिर के उत्तरी द्वार पर "स्त्रियाँ" बैठी दिखाई जाती हैं जो तम्मूज़ के लिए रो रही हैं। यह दृश्य उन "घृणित कामों" में गिना गया है जिनकी नबी निंदा करता है।
तम्मूज़ कौन था। तम्मूज़ सुमेरी देवता दुमुज़ी (अक्कादी में दुऊज़ू) का इब्रानी रूप है, जो देवी इन्नाना (इश्तार) का पति माना जाता था। मेसोपोटामिया की कथा के अनुसार वह हर वर्ष पाताल लोक में जाता और लौटता था। इसी से जुड़े अनुष्ठानों में उसकी मृत्यु पर विलाप किया जाता था। यह मूलतः ऋतु-चक्र और वनस्पति के मरने और फिर उगने का पंथ था।
इस पाठ में क्या है और क्या नहीं।
- है: महिलाओं का विलाप, तम्मूज़ का नाम, मूर्तिपूजा की निंदा।
- नहीं है: उपवास का उल्लेख, पति की आयु की कामना, चंद्रमा, अर्घ्य, छलनी, करवा, सरगी, या भारत।
यहूदी कैलेंडर में तम्मूज़। तम्मूज़ यहूदी कैलेंडर के एक महीने का नाम भी है, जो बाबुल के निर्वासन के समय से आया। इस महीने की 17 तारीख को यहूदी लोग उपवास रखते हैं, पर वह यरूशलेम की दीवार टूटने की याद में है, तम्मूज़ देवता के शोक में नहीं। इसलिए "तम्मूज़ महीने का उपवास" को देवता के लिए उपवास समझना भूल होगी।
5. बाइबल में चंद्र-पूजा और "स्वर्ग की रानी"
चंद्र-पूजा का निषेध। इन आयतों में इस्राएलियों को सूर्य, चंद्रमा और तारों की पूजा से रोका गया है:
- व्यवस्थाविवरण 4:19 और 17:3
- 2 राजा 23:5 (राजा योशिय्याह के सुधार)
- अय्यूब 31:26-28
व्यवस्थाविवरण 4:19 की व्याख्या पर विद्वानों में मतभेद है कि आकाशीय पिंडों के "सब जातियों को दिए जाने" का अर्थ क्या है। यह आयत इस्राएल के लिए स्पष्ट निषेध है। पर किसी अन्य जाति में चंद्र-पूजा होने का अर्थ यह नहीं कि वह बाद में किसी अन्य देश के पर्व में बदल गई।
"स्वर्ग की रानी"। यिर्मयाह 7:18 और 44:17-19 में महिलाएँ "स्वर्ग की रानी" के लिए पेड़-पूजा के पकवान, धूप और अर्घ्य चढ़ाती हैं। अधिकांश विद्वान इसे इश्तार या अस्तार्ते जैसी देवी मानते हैं, जो शुक्र तारे से जुड़ी थी। इसे सीधे चंद्रमा की देवी कहना निश्चित नहीं है। यिर्मयाह 44:19 में स्त्रियाँ यह भी कहती हैं कि वे यह सब अपने पतियों की सहमति से करती हैं।
मेसोपोटामिया में चंद्र-देवता। वहाँ चंद्र-देवता का नाम सिन (सुमेरी में नन्ना) था, जिसके प्रमुख केंद्र ऊर और हारान थे। यह पुरुष देवता था और उसका उपासना-संबंध तम्मूज़ के विलाप से अलग था।
6. बाइबल में भारत का नाम
एस्तेर 1:1 और 8:9 में फ़ारसी राजा क्षयर्ष (अहश्वेरोश) के राज्य को "हिन्दुस्तान से कूश तक" 127 प्रांतों का बताया गया है। इब्रानी शब्द "होद्दू" सिंधु घाटी या उसके निकटवर्ती क्षेत्र का सूचक है, जो उस समय फ़ारसी साम्राज्य की पूर्वी सीमा थी।
यह तथ्य सही और रोचक है, पर इससे सिर्फ़ इतना सिद्ध होता है कि फ़ारसी साम्राज्य की सीमा भारत तक थी। एस्तेर की किताब में चंद्र-पूजा, तम्मूज़ या पति की आयु के व्रत का कोई उल्लेख नहीं है। एस्तेर 4:16 में जो उपवास है, वह यहूदियों को नरसंहार से बचाने के लिए तीन दिन का सामूहिक उपवास है।
7. सेमिरामिस वाला दावा
ऐतिहासिक सेमिरामिस। सेमिरामिस का आधार शम्मुरामत नामक असीरियाई रानी थी, जिसने लगभग 811 से 806 ईसा पूर्व में अपने पुत्र के नाबालिग रहते शासन चलाया। बाद में यूनानी लेखकों ने उसके बारे में अर्ध-पौराणिक कथाएँ गढ़ीं।
हिस्लोप की किताब। स्कॉटलैंड के पादरी अलेक्ज़ेंडर हिस्लोप ने 1850 के दशक में The Two Babylons लिखी। इसमें दावा किया गया कि निम्रोद, सेमिरामिस और तम्मूज़ की एक त्रयी से सारी बाबुली-पूजा निकली और बाद के कई धर्मों की प्रथाएँ उसी से आईं। यह किताब आज भी कुछ समूहों में लोकप्रिय है।
विद्वानों की आपत्ति। असीरियोलॉजी और इतिहास के विद्वान इस किताब को अविश्वसनीय मानते हैं, क्योंकि:
- इसमें निम्रोद, सेमिरामिस और तम्मूज़ को माँ-पति-पुत्र की त्रयी बताया गया है, जबकि किसी प्राचीन मेसोपोटामियाई पाठ में ऐसी त्रयी नहीं मिलती।
- नामों की समानता और शब्दों की खींचतान से संबंध जोड़े गए हैं।
- असंबंधित संस्कृतियों की प्रथाओं को एक ही स्रोत से निकला मान लिया गया।
- कई मेसोपोटामियाई पाठ बाद में पढ़े और समझे गए, और उनसे हिस्लोप की बातें समर्थित नहीं होतीं।
इसलिए "सेमिरामिस ने तम्मूज़ के लिए महिलाओं का उपवास शुरू किया" एक ऐसा कथन है जिसका प्राचीन स्रोतों में आधार नहीं मिलता।
8. दोनों को जोड़ने के लिए क्या प्रमाण चाहिए
किसी प्रथा को दूसरी प्रथा से निकला हुआ सिद्ध करने के लिए आमतौर पर ये कड़ियाँ चाहिए:
- समान रीतियाँ। यहाँ तम्मूज़ के विलाप में रोना है, करवा चौथ में उपवास, चंद्र-अर्घ्य और पति की आयु की कामना है। मूल रीति समान नहीं है।
- ऐतिहासिक निरंतरता। मेसोपोटामिया से भारत तक किसी व्यापारिक, सांस्कृतिक या धार्मिक मार्ग का प्रमाण होना चाहिए जिससे यह प्रथा यात्रा करती दिखे। ऐसा कोई प्रमाण नहीं है।
- लिखित या पुरातात्त्विक साक्ष्य। कोई शिलालेख, पाठ या पुरावशेष चाहिए जो दोनों को जोड़े। नहीं मिलता।
- भाषा और नामों का संबंध। "करवा" और "चौथ" संस्कृत-हिंदी मूल के शब्द हैं, जिनका तम्मूज़ से कोई भाषाई संबंध नहीं।
- समय का मेल। तम्मूज़ का शोक ग्रीष्म के आरंभ (जून-जुलाई के आसपास) से जुड़ा था, जबकि करवा चौथ शरद ऋतु में कार्तिक में पड़ता है।
इन पाँचों कसौटियों पर संबंध का दावा खरा नहीं उतरता।
9. समानता से निष्कर्ष निकालने की भूल
किसी भी दो संस्कृतियों में कुछ साझा बातें मिल जाना स्वाभाविक है: स्त्रियाँ परिवार के लिए उपवास रखती हैं, चंद्रमा का सम्मान करती हैं, या किसी के जाने पर शोक मनाती हैं। मानव समाजों में ऐसी समानताएँ अलग-अलग जगह स्वतंत्र रूप से भी पैदा होती हैं। "दोनों में चाँद या उपवास है, इसलिए एक दूसरे से निकला" वाला तर्क तब तक कमज़ोर है जब तक सीधा ऐतिहासिक सूत्र न दिखे।
10. आस्था और इतिहास का अंतर
किसी का करवा चौथ को श्रद्धा से मनाना उसकी निजी आस्था है, और यह सम्मान का विषय है। यह लेख आस्था पर प्रश्न नहीं उठाता। पर "यह पर्व किसने और कहाँ से शुरू किया" और "क्या यह बाइबल में है" जैसे प्रश्न तथ्य और पाठ के हैं, जिन्हें स्रोत देखकर जाँचा जा सकता है। बाइबल का पाठ सबके सामने है, और उसमें करवा चौथ नहीं है। जहाँ दावा ऐतिहासिक हो, वहाँ प्रमाण की माँग उचित है, चाहे दावा किसी भी पक्ष का हो।
11. संक्षिप्त तुलना
तम्मूज़ का विलाप (यहेजकेल 8:14): मेसोपोटामियाई देवता, स्त्रियों का रोना, मंदिर-द्वार पर, मूर्तिपूजा के रूप में निंदित, उपवास का उल्लेख नहीं।
करवा चौथ: हिंदू लोक-परंपरा, पति की आयु की कामना, दिन भर का व्रत, चंद्र-अर्घ्य और छलनी, कथाएँ भारतीय पात्रों की।
साझा बिंदु: दोनों में स्त्रियाँ किसी धार्मिक रीति में भाग लेती हैं। इसके अलावा कोई ठोस साझा तत्व नहीं। इसलिए तथ्यात्मक निष्कर्ष यही है कि दोनों के बीच संबंध एक अनुमान है, सिद्ध इतिहास नहीं। जो इसे अपनी निजी मान्यता के रूप में रखना चाहे, वह रख सकता है, पर इसे इतिहास या बाइबल का सिद्ध तथ्य कहना उचित नहीं होगा।
संदर्भ के लिए सुझाए गए स्रोत
- बाइबल: यहेजकेल 8:14; यिर्मयाह 7:18 और 44:17-19; व्यवस्थाविवरण 4:19 और 17:3; 2 राजा 23:5; अय्यूब 31:26-28; एस्तेर 1:1, 4:16 और 8:9
- अलेक्ज़ेंडर हिस्लोप, The Two Babylons (विवादित; समझने के लिए, प्रमाण के रूप में नहीं)
- मेसोपोटामिया के देवताओं पर: दुमुज़ी और इन्नाना की कथाओं पर असीरियोलॉजी के विद्वानों के शोध
- भारतीय व्रत-परंपरा पर: लोक-संस्कृति और व्रत-कथा साहित्य पर विद्वानों के अध्ययन।
निष्कर्ष
- बाइबल में महिलाओं द्वारा तम्मूज़ के लिए विलाप का वर्णन है (यहेजकेल 8:14)।
- बाइबल में चंद्र-पूजा का निषेध और "स्वर्ग की रानी" की पूजा का उल्लेख है।
- बाइबल में भारत का नाम भी आया है (एस्तेर 1:1, 8:9)।
- पर बाइबल में करवा चौथ का नाम या वर्णन नहीं है।
- सेमिरामिस-तम्मूज़-करवा चौथ की कड़ी का कोई विश्वसनीय ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है, और यह दावा मुख्यतः उन्नीसवीं सदी की एक विवादित किताब से फैला।
- करवा चौथ की जड़ें भारतीय लोक और धार्मिक परंपरा में हैं, और उसके उत्पत्ति-सिद्धांत भी भारत के भीतर ही खोजे जाते हैं।
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