आपका घर - स्वर्ग का दूतावास | आपका घर पृथ्वी पर स्वर्ग है | Aapka Ghar Swarg Ka Dutavas | My House Embassy Of Heaven Hindi Sermon

मुख्य वचन: "तुम इस संसार के नहीं... परन्तु मैंने तुम्हें संसार में से चुन लिया है।" (यूहन्ना 15:19)
"हमारी नागरिकता तो स्वर्ग में है।" (फिलिप्पियों 3:20)
आज का संदेश: आपका घर इंदौर में है, पर इंदौर का नहीं है। आज दुनिया के हर देश का दूसरे देश में एक दूतावास (Embassy) होता है। दूतावास उस देश की धरती पर तो होता है, पर उस पर उस देश का कानून नहीं, अपने देश का कानून चलता है।
परमेश्वर कह रहा है - तुम्हारा घर इस मोहल्ले में तो है, पर इस मोहल्ले का नहीं है। तुम्हारा घर स्वर्ग का दूतावास है। इंदौर में रहकर भी तुम्हारे घर में इंदौर की भाषा, इंदौर का डर, इंदौर की बीमारी, इंदौर की चिंता नहीं चलेगी। तुम्हारे घर में स्वर्ग का कानून चलेगा - प्रेम का, शांति का और चंगाई का। जब तक आप अपने घर को केवल एक मकान समझेंगे, वह संसार के अधीन रहेगा। जिस दिन आप समझ जाएँगे कि यह स्वर्ग का दूतावास है, उस दिन आपका घर स्वर्ग के अधिकार में आ जाएगा।
मुख्य वचन: फिलिप्पियों 3:20 - "हमारी नागरिकता स्वर्ग में है।"
यहोशू 24:15 - "परन्तु मैं और मेरा घराना यहोवा की सेवा करेंगे।"
प्रस्तावना: दूतावास क्या होता है? जब आप अमेरिका के दूतावास में भारत में जाते हो, तो आप अमेरिका में होते हो, भले ही जमीन भारत की हो। वहाँ अमेरिका के कानून चलते हैं, भारत के नहीं। वैसे ही आपका घर - पृथ्वी पर होते हुए भी स्वर्ग का दूतावास है। यहाँ स्वर्ग का कानून चलेगा, नरक का नहीं।
1. दूतावास के 3 नियम तुम्हारे घर में:
a) सुरक्षा का नियम: दूतावास पर कोई हमला नहीं कर सकता। भजन 91:10 - "कोई विपत्ति तेरे निकट न आएगी।" तुम्हारा घर सुरक्षित है।
b) प्रावधान का नियम: दूतावास का खर्चा उसका देश उठाता है। तुम्हारे घर का खर्चा स्वर्ग उठाएगा - फिलिप्पियों 4:19
c) पहुँच का नियम: दूतावास से सीधी बात अपने देश से होती है। तुम्हारी प्रार्थना सीधी स्वर्ग में सुनी जाती है।
2. घर को दूतावास कैसे बनाएं?
4 स्तम्भ:
i) प्रार्थना की वेदी: हर दूतावास में झंडा होता है। तुम्हारे घर का झंडा - प्रार्थना है। रोज सुबह-शाम वेदी पर प्रार्थना जलनी चाहिए।
ii) वचन का संविधान: दूतावास में अपने देश का संविधान चलता है। तुम्हारे घर में बाइबल का संविधान चलना चाहिए, दुनिया का नहीं।
iii) स्तुति की भाषा: दूतावास में अपनी भाषा बोली जाती है। स्वर्ग की भाषा - स्तुति, धन्यवाद, अन्य भाषा।
iv) पवित्र आत्मा का राजदूत: हर दूतावास में राजदूत रहता है। तुम्हारे घर में पवित्र आत्मा राजदूत है। उसे दुखी मत करो।
3. दूतावास में शैतान का प्रवेश वर्जित है!
जैसे किसी देश की पुलिस बिना अनुमति के दूसरे देश के दूतावास में नहीं घुस सकती, वैसे शैतान तुम्हारे घर में नहीं घुस सकता। 
घोषणा करो - "यह घर स्वर्ग का दूतावास है, यहाँ कलह, बीमारी, कर्ज का प्रवेश वर्जित है!"
घोषणा: "मैं और मेरा घराना यहोवा की सेवा करेंगे! मेरा घर पृथ्वी पर स्वर्ग का दूतावास है!"
स्वर्ग के दूतावास के 3 नियम:
1. दूतावास में अपने राजा की आराधना होती है, पड़ोसी राजा की नहीं।
दूतावास में दूसरे देश का झंडा नहीं लगता, केवल अपने राजा का झंडा लगता है।
आज आपके घर में किसकी आराधना हो रही है? क्या वहाँ डर की आराधना हो रही है - "क्या होगा?" क्या वहाँ पैसे की आराधना हो रही है? आज अपने घर में यीशु का झंडा लगाइए। सुबह उठते ही पहला गीत यीशु का, पहली बात यीशु की। जहाँ आराधना होती है, वहाँ राजा स्वयं आ जाता है।
2. दूतावास में अपने देश की भाषा बोली जाती है।  अमेरिका के दूतावास में जाकर लोग हिन्दी नहीं, अंग्रेजी बोलते हैं, क्योंकि वह अमेरिका है।
स्वर्ग की भाषा क्या है? 
विश्वास की भाषा। संसार कहता है - "मैं बीमार हूँ, मैं हार गया, अब कुछ नहीं हो सकता।" स्वर्ग कहता है - "उसके कोड़े खाने से मैं चंगा हो गया हूँ, मैं जयवंत से भी बढ़कर हूँ, सब कुछ हो सकता है ।" आज से अपने घर में स्वर्ग की भाषा बोलिए। 
बीमारी में भी कहिए - हम चंगे हैं। कमी में भी कहिए - मेरा परमेश्वर सारी घटी को पूरा करेगा।
3. दूतावास में शरण मिलती है ।
जब किसी देश में युद्ध होता है, तो लोग दूतावास की ओर भागते हैं, क्योंकि वहाँ सुरक्षा है। परमेश्वर तुम्हारे घर को मोहल्ले के लिए शरण-स्थान बनाना चाहता है। जब पड़ोसी डरे हुए और टूटे हुए हों, तो वे कहें - चलो, उनके घर चलते हैं, वहाँ शांति है। तुम्हारा घर केवल तुम्हारे परिवार के लिए नहीं, पूरी कॉलोनी के लिए उत्तर है।
याद रखिए - दूतावास छोटा हो सकता है, पर उसका अधिकार सबसे बड़ा होता है।
आज की प्रार्थना: पिता, आज हम समझ गए हैं। हमारा घर केवल ईंट और सीमेंट का घर नहीं, यह स्वर्ग का दूतावास है। आज से इस घर में स्वर्ग का राज्य चलेगा।
यहाँ आराधना होगी, यहाँ विश्वास की भाषा बोली जाएगी। हमारे घर को इस मोहल्ले के लिए शरण-स्थान बना। यीशु के नाम में, आमीन।
आज की घोषणा: अपने घर के दरवाजे पर हाथ रखकर कहिए - "यह घर यीशु मसीह का दूतावास है! यहाँ स्वर्ग का कानून चलता है! यहाँ बीमारी, डर और कमी का कोई अधिकार नहीं है!"
आज का कार्य: आज अपने घर में एक छोटा-सा झंडा या वचन का पोस्टर लगाइए जिस पर लिखा हो - "परन्तु मैं और मेरा घराना यहोवा की सेवा करेंगे ।" (यहोशू 24:15)
शालोम, यह आपके घर को दूतावास घोषित करने का चिह्न होगा ।

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