गृह कलीसिया - हर घर में घरेलू कलीसिया | 1 कुरिन्थियों 16:19 | House Church in Hindi

घरेलू कलीसिया
1. परिचय: घरेलू कलीसिया कोई आधुनिक प्रयोग नहीं है। कलीसिया ने सबसे पहले इसी रूप में एकत्र होना शुरू किया था। आरंभिक विश्वासियों के लिए परिवार का घर ही प्रार्थना, शिक्षा, प्रभु भोज और संगति के लिए स्वाभाविक स्थान था। यह विषय देखता है कि पवित्रशास्त्र घरों में कलीसिया के बारे में क्या कहता है, और आज के विश्वासियों के लिए इसका क्या अर्थ है। गृह कलीसिया क्या है? बाइबल बताती है कि पहली कलीसिया घरों में मिलती थी। हर घर में कलीसिया - 1 कुरिन्थियों 16:19 पर अध्ययन।
2. कलीसिया भवन नहीं, लोग हैं: यूनानी शब्द एक्लेसिया का अर्थ है "बुलाए गए लोग" या "सभा"। यह मसीह के लोगों के समूह को दर्शाता है, किसी इमारत को नहीं। यीशु ने कहा, "जहाँ दो या तीन मेरे नाम पर इकट्ठे होते हैं, वहाँ मैं उनके बीच में होता हूँ" (मत्ती 18:20)। पौलुस कलीसिया को "परमेश्वर का घराना" कहता है (1 तीमुथियुस 3:15), और विश्वासियों से कहता है कि तुम "परमेश्वर के घराने के सदस्य" हो (इफिसियों 2:19)। पतरस कलीसिया को "आत्मिक घर" कहता है, जो जीवित पत्थरों से बना है (1 पतरस 2:5)।
चूँकि कलीसिया एक परिवार है, वह वहीं इकट्ठा हो सकती है जहाँ परमेश्वर का परिवार उपस्थित है। परिवार के लिए घर सबसे स्वाभाविक स्थान है।
3. आरंभिक कलीसिया घरों में एकत्र होती थी: नए नियम में कई घरों का उल्लेख है जहाँ विश्वासी इकट्ठे होते थे: ऊपरी कमरा यरूशलेम में, जहाँ यीशु के स्वर्गारोहण के बाद चेले दूसरों के साथ प्रार्थना करते थे (प्रेरितों 1:13-14)। मरियम का घर, यूहन्ना मरकुस की माता का, जहाँ कई विश्वासी प्रार्थना के लिए इकट्ठे होते थे (प्रेरितों 12:12)।
लुदिया का घर फिलिप्पी में, जो वहाँ की कलीसिया का आधार बना (प्रेरितों 16:14-15, 40)। अक्विला और प्रिस्किल्ला का घर, जहाँ रोम में और बाद में इफिसुस में एक कलीसिया मिलती थी (रोमियों 16:3-5; 1 कुरिन्थियों 16:19)।
नुम्फा का घर लौदीकिया में, जहाँ एक कलीसिया एकत्र होती थी (कुलुस्सियों 4:15)।
फिलेमोन का घर, जहाँ फिलेमोन के परिवार के साथ एक कलीसिया मिलती थी (फिलेमोन 1-2)।
पौलुस का किराए का घर रोम में, जहाँ उसने दो साल तक आने वालों का स्वागत किया और सिखाया (प्रेरितों 28:30-31)।
ये उदाहरण दिखाते हैं कि कलीसिया घरानों के द्वारा बढ़ी। जब किसी घर ने अपने दरवाज़े खोले, तो वहाँ एक कलीसिया आकार लेने लगी।
4. परिवार, विश्वास और घर में आराधना: आरंभिक कलीसिया का विश्वास परिवारों के भीतर आगे बढ़ा। पौलुस तीमुथियुस की नानी लोइस और माता यूनीके के सच्चे विश्वास को याद करता है, और फिर तीमुथियुस में उसी विश्वास को (2 तीमुथियुस 1:5)। पवित्रशास्त्र माता-पिता को अपने बच्चों को परमेश्वर के वचन सिखाने का काम देता है: "तू इन्हें अपने बच्चों को मन लगाकर सिखाना, और जब तू अपने घर में बैठा हो, और जब मार्ग में चलता हो, तब इनकी चर्चा करना" (व्यवस्थाविवरण 6:6-7; इफिसियों 6:4 भी देखें)।
जो घर परमेश्वर से प्रेम करता है, वह प्रार्थना, वचन पढ़ने, भजन गाने और एक-दूसरे को प्रोत्साहित करने की जगह बन जाता है। ये रोज़ की बातें कलीसिया के जीवन से अलग नहीं, उसी का हिस्सा हैं।
5. साझा भोजन और प्रभु भोज: आरंभिक विश्वासी "घर-घर में रोटी तोड़ते" थे और आनन्द और उदार मन से एक साथ भोजन करते थे (प्रेरितों 2:46)। प्रभु भोज एक असली भोजन से जुड़ा था, जो घर की मेज़ पर साझा किया जाता था।
पौलुस ने कुरिन्थ की कलीसिया को इसलिए डाँटा क्योंकि कुछ लोग भरपेट खाते थे और कुछ भूखे रह जाते थे। इससे भोजन एकता के बजाय फूट का कारण बन गया (1 कुरिन्थियों 11:20-22)। सीख यह है कि मेज़ स्मरण, समानता और एक-दूसरे की देखभाल की जगह होनी चाहिए।
6. मेहमाननवाज़ी: मेहमाननवाज़ी एक परिपक्व विश्वासी और अगुवे की स्पष्ट पहचान थी। पौलुस इसे अगुवे की योग्यता में गिनता है (तीतुस 1:8; 1 तीमुथियुस 3:2)। उसने विश्वासियों को इसे निभाने के लिए प्रोत्साहित किया (रोमियों 12:13), और पतरस ने कहा कि यह "बिना कुड़कुड़ाए" होनी चाहिए (1 पतरस 4:9)। इब्रानियों का लेखक कहता है, "अजनबियों की मेहमानदारी करना न भूलो, क्योंकि इसके द्वारा कितनों ने बिना जाने स्वर्गदूतों की मेहमानदारी की है" (इब्रानियों 13:2)।
मेहमाननवाज़ी सुसमाचार के लिए दरवाज़ा खोलती है। मेज़ पर बैठा मेहमान सुन सकता है, प्रश्न पूछ सकता है, और परमेश्वर के लोगों से मिल सकता है। इसीलिए घरेलू कलीसियाएँ अक्सर पड़ोसियों और मित्रों के बीच बढ़ी हैं।
7. घर में अगुवाई: घरेलू कलीसियाओं के अगुवे परिपक्व और सिखाए जाने योग्य विश्वासी थे, जो उन्हें सौंपे गए लोगों की देखभाल करते थे। पतरस प्राचीनों से आग्रह करता है कि वे परमेश्वर के झुंड की रखवाली "दबाव से नहीं, परन्तु अपनी इच्छा से... झुंड के लिए आदर्श बनकर" करें (1 पतरस 5:2-3)। पौलुस ने तीतुस से कहा कि हर नगर में प्राचीन नियुक्त करे (तीतुस 1:5)।
पौलुस ने अपने आप को उन लोगों का पिता बताया जिन्हें उसने सुसमाचार के द्वारा मसीह तक पहुँचाया था: "मसीह यीशु में मैं ही सुसमाचार के द्वारा तुम्हारा पिता हुआ" (1 कुरिन्थियों 4:15)। आत्मिक पिता और माताएँ केवल औपचारिक प्रशिक्षण से नहीं, बल्कि लोगों के साथ बिताए समय से बनते हैं। जिस व्यक्ति ने अपना घर खोला, वह अक्सर उस सभा का स्वाभाविक चरवाहा बन गया।
घरेलू कलीसिया में अगुवाई साझा होती है। पौलुस ने पूरी मंडलियों को निर्देश दिए, और आरंभिक कलीसियाओं में प्राचीनों की एक टोली दिखती है (प्रेरितों 14:23; तीतुस 1:5)। परिपक्व विश्वासियों का एक छोटा समूह बिना किसी बड़े संस्थान के एक-दूसरे की देखभाल कर सकता है।
8. घर से मिशन: यीशु ने अपने चेलों को ऐसे निर्देशों के साथ भेजा जो घरानों पर केंद्रित थे। उन्हें "शान्ति के पात्र" को ढूँढना था, उसी घर में ठहरना था, जो उनके सामने रखा जाए वही खाना था, और यह प्रचार करना था कि परमेश्वर का राज्य निकट आ गया है (लूका 10:5-9)। घर पड़ोस तक संदेश फैलाने का आधार बना।
पौलुस का अपना सेवाकार्य अक्सर इसी ढंग से चला। लुदिया के घराने ने सुसमाचार ग्रहण किया और फिलिप्पी की कलीसिया का आरंभ बना। जब परिवार अपना जीवन दूसरों के लिए खोलते हैं, तो सुसमाचार का काम स्वाभाविक रूप से बढ़ता है।
9. दान और संसाधन: कलीसिया में दान स्वेच्छा से और आनन्द से दिया जाना चाहिए। "हर एक जैसा अपने मन में ठान ले, वैसा ही दे; न कुड़कुड़ाकर, न दबाव से, क्योंकि परमेश्वर हर्ष से देने वाले से प्रेम रखता है" (2 कुरिन्थियों 9:7)। आरंभिक विश्वासियों ने अपनी संपत्ति बाँटी ताकि किसी को कमी न रहे (प्रेरितों 2:44-45; 4:32-35)।
घरेलू कलीसिया को महँगी इमारतों या बड़े बजट की ज़रूरत नहीं होती। उसके संसाधन सदस्यों की देखभाल, ज़रूरतमंदों की सहायता, सुसमाचार फैलाने और सेवकों को भेजने में लगते हैं। ध्यान लोगों पर है, संपत्ति पर नहीं।
10. घर में प्रार्थना, शिष्यता और वचन: घरेलू कलीसिया शिष्यता की पाठशाला है। विश्वासी एक साथ बाइबल पढ़ना, प्रश्न पूछना, परमेश्वर के वचन का पालन करना और एक-दूसरे को प्रोत्साहित करना सीखते हैं। पौलुस ने तीमुथियुस से कहा कि जो बातें उसने सुनी हैं, उन्हें विश्वासयोग्य लोगों को सौंप दे जो दूसरों को भी सिखा सकें (2 तीमुथियुस 2:2)। रिश्तों के द्वारा सत्य को आगे पहुँचाना ही घर-आधारित शिष्यता का हृदय है।
प्रार्थना घर के दैनिक जीवन का हिस्सा है। आरंभिक विश्वासी प्रार्थना में लगे रहते थे (प्रेरितों 2:42), और ज़रूरत और आनन्द दोनों के समय वे साथ मिलकर प्रार्थना करते थे (प्रेरितों 4:24-31; 12:5)।
11. गलतफ़हमियों से बचाव: घरेलू कलीसिया एक बाइबलीय मॉडल है, लेकिन कलीसिया होने का यही एकमात्र तरीका नहीं है। पवित्रशास्त्र दूसरी जगहों पर इकट्ठा होने से मना नहीं करता, और आज विश्वासी कई स्थानों पर मिल सकते हैं। असली सवाल यह है कि क्या सभा में मसीह की उपस्थिति, वचन की शिक्षा, प्रार्थना, प्रेम, प्रभु भोज और सुसमाचार का मिशन दिखाई देता है।
घरेलू कलीसिया मसीह की व्यापक देह से अलग होने का नाम भी नहीं है। घरों में रहने वाले विश्वासी दूसरे विश्वासियों से जुड़े रहते हैं, परिपक्व अगुवों के अधीन रहते हैं, और अलग-अलग पीढ़ियों से सीखते हैं।
12. व्यावहारिक उपयोग: जो विश्वासी या अगुवा अपने घर को कलीसिया के लिए खोलना चाहता है, वह इन कदमों पर विचार कर सकता है:
प्रार्थना करें और परमेश्वर से "शान्ति का पात्र" माँगें, एक ऐसा घराना जो उसके लिए खुला हो।
कुछ मित्रों या परिवार के सदस्यों को साथ भोजन और वचन पढ़ने के लिए बुलाएँ।
एक अंश साथ मिलकर पढ़ें और तीन प्रश्न पूछें: हमने क्या सीखा? हम इसे कैसे जीएँगे? हम इसे किसके साथ बाँटेंगे?
नए लोगों के साथ सुसमाचार बाँटें और उन्हें मसीह का अनुसरण करने के लिए आमंत्रित करें।
एक-दूसरे की ज़रूरतों और परमेश्वर के राज्य की बढ़ोतरी के लिए प्रार्थना करें।
ऐसे विश्वासयोग्य लोगों को खोजें जिन्हें शिक्षा और देखभाल सौंपी जा सके।
13. सारांश: कलीसिया एक परिवार है, परमेश्वर का घराना, और वह वहीं इकट्ठा हो सकती है जहाँ परमेश्वर के लोग एकत्र होते हैं। आरंभिक कलीसिया घरों, साझा भोजन, मेहमाननवाज़ी और परिपक्व विश्वासियों की धैर्यवान शिष्यता के द्वारा बढ़ी। वचन और रिश्तों पर आधारित घरेलू कलीसिया ऐसी जगह बन सकती है जहाँ लोग मसीह से मिलते हैं, उसका अनुसरण करना सीखते हैं, और अपने आसपास के लोगों तक पहुँचते हैं।
मुख्य पद: मत्ती 18:20; प्रेरितों 2:42-47; प्रेरितों 16:14-15; रोमियों 16:5; 1 कुरिन्थियों 11:20-22; 1 कुरिन्थियों 16:19; कुलुस्सियों 4:15; फिलेमोन 2; इफिसियों 2:19-22; 2 तीमुथियुस 1:5; 2 तीमुथियुस 2:2; इब्रानियों 13:2; लूका 10:5-9।

मनन के प्रश्न:
मेरा घराना कौन है, और मेरा "शान्ति का पात्र" कौन हो सकता है?
मेरा घर परमेश्वर के परिवार को कैसे दर्शाता है?
मेरी मेज़ स्मरण और स्वागत की जगह कैसे बन सकती है?
अगर आप चाहें, तो मैं इसे अपनी श्रृंखला के प्रारूप में छोटा करके ब्लॉग संदेश बना सकता हूँ, जिसमें मुख्य पद, क्रमांकित भाग, "तुम्हारे घर के लिए" बिंदु, 3 काम, प्रार्थना होंगे, और अंत "शालोम" से होगा।

घरेलू कलीसिया: परमेश्वर का घराना
मुख्य पद: "जहाँ दो या तीन मेरे नाम पर इकट्ठे होते हैं, वहाँ मैं उनके बीच में होता हूँ।" (मत्ती 18:20)
1. कलीसिया एक भवन नहीं, एक परिवार है
नए नियम में "कलीसिया" का अर्थ है "बुलाए गए लोग"। यह लोगों का समूह है, कोई इमारत नहीं। पौलुस कलीसिया को "परमेश्वर का घराना" कहता है (1 तीमुथियुस 3:15)। जहाँ परमेश्वर का परिवार है, वहीं कलीसिया है।
2. आरंभिक कलीसिया घरों में मिलती थी
ऊपरी कमरे में प्रार्थना करते चेले (प्रेरितों 1:13-14), मरियम का घर जहाँ विश्वासी प्रार्थना करते थे (प्रेरितों 12:12), लुदिया का घर फिलिप्पी में (प्रेरितों 16:14-15), अक्विला और प्रिस्किल्ला का घर (रोमियों 16:5)। जब घर ने अपने दरवाज़े खोले, तो वहाँ कलीसिया बढ़ी।
3. घर में विश्वास पीढ़ी-दर-पीढ़ी पहुँचता है
पौलुस तीमुथियुस की नानी लोइस और माता यूनीके के विश्वास को याद करता है (2 तीमुथियुस 1:5)। परमेश्वर ने माता-पिता को सौंपा है कि वे अपने बच्चों को वचन सिखाएँ, "जब तू अपने घर में बैठा हो, और जब मार्ग में चलता हो" (व्यवस्थाविवरण 6:6-7)।
4. मेज़ पर स्वागत और संगति
आरंभिक विश्वासी "घर-घर में रोटी तोड़ते" थे और उदार मन से साथ खाते थे (प्रेरितों 2:46)। पौलुस ने कुरिन्थ में इसलिए डाँटा क्योंकि कुछ भरपेट खाते थे और कुछ भूखे रहते थे (1 कुरिन्थियों 11:21)। मेज़ पर समानता और प्रेम होना चाहिए।
5. घर से सुसमाचार: यीशु ने चेलों को भेजते समय कहा, "जिस घर में शान्ति का पात्र हो, वहाँ ठहरो" (लूका 10:5-6)। घर वह जगह बनता है जहाँ पड़ोसी और मित्र आते हैं, सुनते हैं, और मसीह को जानते हैं।
तुम्हारे घर के लिए:
आपका घर परमेश्वर के परिवार को कैसे दिखाता है?
क्या आपकी मेज़ पर कोई अजनबी या पड़ोसी बैठ सकता है?
आपके परिवार में विश्वास की बात कौन आगे बढ़ा रहा है?
3 काम: इस सप्ताह परिवार के साथ एक भोजन करें और उसमें परमेश्वर के वचन का एक पद पढ़ें।
एक पड़ोसी या मित्र को अपने घर चाय या भोजन पर बुलाएँ।
अपने बच्चों या परिवार के किसी सदस्य के साथ एक छोटी बाइबल चर्चा शुरू करें: क्या सीखा? इसे कैसे जीना है? किसके साथ बाँटना है?
प्रार्थना: हे प्रभु यीशु, हमारे घरों को अपने परिवार का स्थान बना। हमें मेहमाननवाज़ी का मन दे, हमारी मेज़ को स्वागत का स्थान बना, और हमारे परिवारों के द्वारा अपने राज्य का विस्तार कर। आमीन।
घोषणा: परमेश्वर का घराना ईंट-पत्थर से नहीं, लोगों से बनता है। जहाँ यीशु के नाम पर दो या तीन इकट्ठे हैं, वहीं कलीसिया है।
हे प्रभु यीशु, हमारे घर को अपना घर बना। हमारे द्वार को सुसमाचार के लिए खोल। आमीन।
मुख्य वचन: मत्ती 18:20, प्रेरित 2:46, 1 कुरिन्थियों 16:19, कुलुस्सियों 4:15, लूका 10:5-9।
आज का कार्य: आज अपने घर में एक व्यक्ति के लिए प्रार्थना करें, और उसे अगले सप्ताह भोजन या चाय पर आमंत्रित करने का निर्णय लें।
शालोम,

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