बच्चों को प्रार्थना कैसे सिखाएँ: उम्र के हिसाब से 7 आसान तरीके
बच्चे प्रार्थना भाषण सुनकर नहीं, घर का माहौल देखकर सीखते हैं। अगर वे रोज़ अपने माता-पिता को परमेश्वर से बात करते देखें, तो प्रार्थना उनके लिए सामान्य और प्यारी चीज़ बन जाती है। इसके लिए कठिन शब्दों की नहीं, सरल और नियमित आदत की ज़रूरत है।
बाइबल क्या कहती है?
- व्यवस्थाविवरण 6:6-7: परमेश्वर के वचन अपने हृदय में रखो और घर में बैठते, चलते, लेटते और उठते समय बच्चों को सिखाओ।
- नीतिवचन 22:6: लड़के को उसी मार्ग की शिक्षा दो जिस पर उसे चलना चाहिए।
- मत्ती 19:14: यीशु ने कहा कि बच्चों को मेरे पास आने दो, उन्हें मत रोको।
- 2 तीमुथियुस 1:5: तीमुथियुस का विश्वास पहले उसकी नानी लोइस और माँ यूनीके में था।
- लूका 11:1: चेलों ने कहा, "प्रभु, हमें प्रार्थना करना सिखा।" यानी प्रार्थना सीखी भी जाती है।
- इफिसियों 6:4: पिताओं को बच्चों को क्रोध न दिलाने और प्रभु की शिक्षा में पालने को कहा गया है।
बच्चों को प्रार्थना सिखाने के 7 तरीके
1. पहले खुद प्रार्थना कीजिए
बच्चे आपकी आदतें देखते हैं। उन्हें दिखने दीजिए कि आप सुबह वचन पढ़ते हैं, खाने से पहले धन्यवाद देते हैं और मुश्किल में प्रार्थना करते हैं। आपका उदाहरण सबसे बड़ी शिक्षा है।
2. प्रार्थना को बातचीत बताइए
बच्चों को बताइए कि प्रार्थना परमेश्वर से बात करना है, जैसे अपने पिता से। कहिए, "तुम परमेश्वर को अपनी बात बता सकते हो, चाहे वह छोटी हो या बड़ी।" इससे प्रार्थना डर या बोझ की जगह प्रेम का रिश्ता लगती है।
3. रोज़ के निश्चित पल चुनिए
तीन आसान समय काफ़ी हैं: सुबह उठकर, भोजन से पहले और रात को सोने से पहले। हर बार 1-2 मिनट। नियमितता से आदत बनती है।
4. चार छोटे हिस्सों का नमूना सिखाइए
छोटे बच्चों के लिए चार वाक्य:
- धन्यवाद: "प्रभु, आज के लिए धन्यवाद।"
- क्षमा: "मुझसे जो ग़लती हुई, उसके लिए माफ़ कर।"
- दूसरों के लिए: "मम्मी, पापा, दादी और मेरे दोस्तों को आशीष दे।"
- अपने लिए: "आज मेरी मदद कर।"
5. उम्र के हिसाब से तरीका बदलिए
- 2 से 4 साल: हाथ जोड़कर, आँखें बंद करके एक वाक्य। आप बोलिए, वे दोहराएँ।
- 5 से 8 साल: अपने शब्दों में छोटी प्रार्थना। चित्र बनवाइए: "आज मैं किसके लिए धन्यवाद दूँ?"
- 9 से 12 साल: प्रार्थना सूची, आयत याद करना और दूसरों के लिए मध्यस्थता
- किशोर: उन्हें खुद बोलने दीजिए। उनके असली सवाल सुनिए। उपदेश की जगह साथ बैठिए। उन्हें डाँटे बिना प्रार्थना का निमंत्रण दीजिए।
6. उत्तर पाई प्रार्थनाओं को साझा कीजिए
जब कोई प्रार्थना सुनी जाए, तो परिवार में बताइए: "देखो, हमने इसके लिए प्रार्थना की थी और प्रभु ने सुनी।" एक कॉपी में "हमारी प्रार्थनाएँ और उत्तर" लिखिए। यह बच्चों के विश्वास को मज़बूत करता है।
7. खेल और रचनात्मकता जोड़िए
- हाथ की उँगलियों की प्रार्थना: अँगूठा (परिवार), तर्जनी (शिक्षक और अगुवे), बीच की उँगली (बीमार और ज़रूरतमंद), अनामिका (मित्र), छोटी उँगली (अपने लिए)
- धन्यवाद का डिब्बा: हर दिन एक पर्ची पर एक धन्यवाद लिखकर डिब्बे में डालिए, और हफ़्ते के अंत में परिवार के साथ पढ़िए
- चित्र प्रार्थना: बच्चा रंग से अपनी प्रार्थना बनाए
- गीत: एक छोटा बाल गीत, जो प्रार्थना के बाद गाया जाए
बच्चों के लिए तीन सरल प्रार्थनाएँ
सुबह: "प्रभु यीशु, इस नए दिन के लिए धन्यवाद। आज मेरे साथ रहना और मुझे अच्छा बच्चा बनने में मदद करना। आमीन।"
भोजन से पहले: "प्रभु, इस भोजन के लिए धन्यवाद। जिन्हें खाना नहीं मिलता, उन्हें भी देना। आमीन।"
रात: "प्रभु, आज के दिन के लिए धन्यवाद। जो मैंने ग़लत किया, उसके लिए माफ़ कर। मुझे और मेरे परिवार को सुरक्षित रखना। आमीन।"
10 मिनट का पारिवारिक प्रार्थना क्रम
1. 2 मिनट: एक छोटा गीत या धन्यवाद
2. 3 मिनट: एक छोटी आयत या बाइबल की कहानी (जैसे दाऊद, दानिय्येल या यीशु का बच्चों को आशीष देना)
3. 2 मिनट: हर सदस्य एक बात बताए जिसके लिए धन्यवाद या प्रार्थना चाहिए
4. 3 मिनट: बारी-बारी से एक-एक वाक्य की प्रार्थना
आने वाली चुनौतियाँ
- बच्चा बेचैन हो: समय छोटा रखिए (2-3 मिनट) और चित्र, गीत या कहानी जोड़िए।
- बच्चा प्रार्थना से इनकार करे: ज़बरदस्ती मत कीजिए। खुद करते रहिए और प्रेम से निमंत्रण देते रहिए। दबाव से प्रार्थना डर बन जाती है।
- बच्चा मज़ाक करे: शांत रहिए। हँसी में भी हृदय सीख रहा होता है। बाद में अकेले में बात कीजिए।
- बच्चा कठिन सवाल पूछे: ("परमेश्वर ने मेरी बात क्यों नहीं सुनी?"): ईमानदारी से कहिए, "मैं भी हमेशा नहीं जानता, पर मैं जानता हूँ कि परमेश्वर हमसे प्रेम करता है।" सवाल पूछना बुरी बात नहीं है।
- किशोर दूर हों: रिश्ता प्राथमिकता रखिए। उन्हें डाँटने की जगह सुनिए, और उनके लिए अकेले में प्रार्थना कीजिए।
माता-पिता के लिए याद रखने की बातें
- डर से नहीं, प्रेम से सिखाइए। "परमेश्वर तुम्हें सज़ा देगा" की जगह "परमेश्वर तुमसे प्रेम करता है" कहिए।
- प्रार्थना को सज़ा न बनाइए। "जाओ, प्रार्थना करो, तुमने ग़लती की" जैसे वाक्य प्रार्थना को बोझ बना देते हैं।
- अपनी कमज़ोरी भी दिखाइए। जब आपसे ग़लती हो, तो बच्चे के सामने क्षमा माँगिए। यह उन्हें सच्चे पश्चात्ताप का उदाहरण देता है।
- जो आपकी पारिवारिक स्थिति है, उसी से शुरू कीजिए।** अगर परिवार में सब विश्वासी नहीं हैं, तो अपने बच्चे के साथ धीरे और प्रेम से शुरू कीजिए।
यह भी याद रखें
बच्चे का विश्वास आख़िर में उसका अपना होता है। आप बीज बोते हैं, परमेश्वर उसे बढ़ाता है (1 कुरिन्थियों 3:6)। इसलिए अपने बच्चों के लिए रोज़ अकेले में प्रार्थना कीजिए, और परिणाम परमेश्वर पर छोड़िए।
निष्कर्ष
बच्चों को प्रार्थना सिखाना सबसे कीमती निवेश है। आज रात सोने से पहले बच्चे के साथ बैठिए और एक वाक्य की प्रार्थना कीजिए। कमेंट में बताइए कि आपके घर में बच्चे कौन सी प्रार्थना सबसे ज़्यादा पसंद करते हैं।
यह भी पढ़ें:
- बच्चों और परिवार के साथ बाइबल मनन कैसे करें।
- घर में प्रार्थना सभा कैसे शुरू करें ।
- प्रभु की प्रार्थना (हे हमारे पिता) का अर्थ ।
शालोम,

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