यहूदा तद्दै कौन था? यहूदा तद्दै, यीशु के बारह चेलों में से एक यीशु के चेले की पूरी जानकरी

यहूदा तद्दै (याकूब का पुत्र): यीशु का वह चेला जिसने एक सवाल पूछा – जीवन, बाइबल में भूमिका और परंपराएँ

लेखक: पी. आर. झरबडे | प्रकाशन तिथि: 28 अक्टूबर 2026

यहूदा तद्दै, याकूब का पुत्र - वही क्षण जब उसने अंतिम भोज के दौरान यीशु से सवाल पूछा था (यूहन्ना 14:22) - _"हे प्रभु, क्या कारण है कि तू अपने आप को हम पर प्रगट करेगा, और संसार पर नहीं?"
परिचय: जब हम यीशु के बारह चेलों की बात करते हैं, तो पतरस, यूहन्ना और याकूब जैसे नाम तुरंत याद आते हैं। लेकिन उन्हीं बारह में एक ऐसा चेला भी था जिसके बारे में नए नियम में बहुत कम लिखा गया है: यहूदा, याकूब का पुत्र, जिसे परंपरा में तद्दै, यहूदा तद्दै भी कहा जाता है। यहूदा तद्दै, याकूब का पुत्र, यीशु के बारह चेलों में से एक था। जानिए बाइबल में उसका उल्लेख, यूहन्ना 14:22 का सवाल, परंपराएँ और संत यहूदा की श्रद्धा।

अक्सर लोग इस यहूदा को दो अन्य व्यक्तियों से मिला देते हैं: यहूदा इस्करियोती (जिसने यीशु को पकड़वाया) और यहूदा की पत्री का लेखक (यीशु का भाई)। इस लेख में हम केवल इसी यहूदा के बारे में जानेंगे। हम यह भी अलग रखेंगे कि बाइबल क्या कहती है और बाद की परंपराएँ क्या बताती हैं, ताकि आप दोनों में फर्क कर सकें।

1. नाम और पहचान

नए नियम की चेलों की सूचियों में यह चेला अलग-अलग नामों से आता है:

  • यहूदा, याकूब का (पुत्र): लूका 6:16 और प्रेरितों के काम 1:13
  • तद्दै: मत्ती 10:3 और मरकुस 3:18
  • लब्बै: मत्ती 10:3 के कुछ प्राचीन पाठों में "लब्बै, जिसका उपनाम तद्दै था"

मत्ती और मरकुस की सूचियों में "यहूदा" नाम नहीं मिलता, और लूका की सूचियों में "तद्दै" नहीं मिलता, जबकि बाकी नाम वही रहते हैं। इसी कारण परंपरा ने माना कि यहूदा और तद्दै एक ही व्यक्ति हैं। यह तर्कसंगत निष्कर्ष है, पर नए नियम में कहीं सीधे यह नहीं लिखा।

यूहन्ना 14:22 में लेखक उसे "यहूदा, इस्करियोती नहीं" कहकर अलग पहचान देता है, ताकि पाठक इस्करियोती से भ्रमित न हों।

नाम का अर्थ: "यहूदा" इब्रानी नाम "यहूदाह" से आया है, जिसका अर्थ "स्तुति" माना जाता है (उत्पत्ति 29:35)।

2. पृष्ठभूमि: परिवार और जन्म

लूका 6:16 और प्रेरितों 1:13 में उसे "याकूब का" कहा गया है। मूल यूनानी पाठ में केवल "याकूब का" लिखा है और अधिकतर विद्वान इसे "पुत्र" पढ़ते हैं। कुछ पुराने अनुवादों में "भाई" भी मिलता है।

यह याकूब कौन था, इसका नए नियम में कोई उत्तर नहीं है। यहूदा के जन्म की तिथि, जन्मस्थान, माँ, पेशा, पत्नी या बच्चों के बारे में भी बाइबल पूरी तरह चुप है।

3. यीशु द्वारा चुना जाना

लूका 6:12-16 के अनुसार यीशु ने पहाड़ पर पूरी रात परमेश्वर से प्रार्थना की, और सुबह अपने चेलों में से बारह को चुनकर उन्हें "प्रेरित" नाम दिया। यहूदा उन बारह में शामिल था।

यह बात ध्यान देने योग्य है कि यीशु ने ये बारह किसी बड़े नाम या ऊँचे पद के आधार पर नहीं चुने थे। इनमें मछुआरे, कर वसूलने वाला मत्ती और उग्रवादी विचारों वाला शमौन कनानी भी थे। यहूदा भी इसी साधारण समूह का हिस्सा था।

4. यूहन्ना 14:22: उसका एकमात्र दर्ज सवाल

पूरे नए नियम में यहूदा का केवल एक कथन दर्ज है। यह अंतिम भोज की रात का प्रसंग है (यूहन्ना 14:22-23)।

यीशु ने अभी कहा था कि जो उनसे प्रेम रखता है, उस पर वे अपने आप को प्रकट करेंगे (यूहन्ना 14:21)। इस पर यहूदा ने पूछा कि प्रभु, ऐसा क्यों है कि आप अपने आप को हम पर प्रकट करेंगे और संसार पर नहीं?

यीशु का उत्तर सीधा था: जो उनसे प्रेम रखता है और उनके वचन को मानता है, उसके साथ पिता और वे निवास करेंगे (यूहन्ना 14:23)। यानी परमेश्वर की उपस्थिति का अनुभव किसी खास समूह की जन्मजात विशेषता नहीं, बल्कि प्रेम और आज्ञाकारिता का फल है।

इस सवाल से यहूदा की एक झलक मिलती है: वह यीशु के शब्दों को ध्यान से सुनने वाला और उनके अर्थ को समझने की कोशिश करने वाला चेला था। शायद वह भी, बाकी चेलों की तरह, किसी बड़े सार्वजनिक प्रकटीकरण की आशा कर रहा था।

5. पुनरुत्थान के बाद

यीशु के स्वर्गारोहण के बाद चेले यरूशलेम लौटे और ऊपरी कमरे में रुके। प्रेरितों 1:13 में ग्यारह प्रेरितों के नाम दोहराए गए हैं और "याकूब का पुत्र यहूदा" उनमें है। अगले पद (1:14) के अनुसार वे सब एक मन होकर लगातार प्रार्थना में लगे रहे, जिनके साथ कुछ स्त्रियाँ, मरियम और यीशु के भाई भी थे।

यहूदा की यही अंतिम बाइबलीय उपस्थिति है। इसके बाद प्रेरितों के काम में उसका कोई उल्लेख नहीं आता।

6. तीन यहूदा: भ्रम कैसे दूर करें

यहूदा तद्दै

यहूदा इस्करियोती

यहूदा, यीशु का भाई

पहचान

बारह प्रेरितों में से एक

बारह प्रेरितों में से एक

यीशु का भाई (मत्ती 13:55)

पिता/संबंध

याकूब का (पुत्र)

शमौन इस्करियोती का पुत्र (यूहन्ना 6:71)

याकूब का भाई (यहूदा 1:1)

मुख्य बात

यूहन्ना 14:22 का सवाल

यीशु को पकड़वाया

यहूदा की पत्री का लेखक

यहूदा की पत्री का लेखक खुद को "यीशु मसीह का दास और याकूब का भाई" कहता है (यहूदा 1:1) और पद 17 में "प्रेरितों" की बातों का हवाला ऐसे देता है जैसे वह उनसे अलग हो। इसी कारण अधिकतर विद्वान पत्री के लेखक को तद्दै से अलग मानते हैं, हालाँकि प्राचीन काल से दोनों के बीच भ्रम चला आ रहा है।

7. परंपराओं में यहूदा तद्दै

नीचे की बातें बाइबल में नहीं हैं। ये बाद की चर्च परंपराएँ हैं, जिन्हें ऐतिहासिक रूप से पक्का नहीं माना जा सकता।

प्रचार यात्राएँ: परंपराओं के अनुसार उसने मेसोपोटामिया, सीरिया, फारस और अर्मेनिया में सुसमाचार का प्रचार किया। अर्मेनियाई चर्च उसे और बर्थोलोमियू को अपने देश का पहला प्रचारक मानता है।

एदेसा की कथा: चर्च इतिहासकार यूसेबियस ने एदेसा (आज का उरफा, तुर्की) के राजा अबगर और तद्दै नामक एक प्रचारक की कथा लिखी है (Ecclesiastical History, पुस्तक 1, अध्याय 13)। उस कथा में तद्दै यीशु के सत्तर शिष्यों में गिना गया है, और आधुनिक इतिहासकार इस कथा की ऐतिहासिकता पर संदेह करते हैं।

शहादत: कुछ परंपराओं के अनुसार वह शमौन कनानी के साथ फारस में शहीद हुआ। उसे कुल्हाड़ी या गदा से मारे जाने की बात कही जाती है, इसीलिए ईसाई कला में उसके हाथ में अक्सर कुल्हाड़ी या गदा दिखाई जाती है। सिर के पास ज्वाला और गले में यीशु के चेहरे वाला पदक भी उसके चिह्न माने जाते हैं।

8. "संत यहूदा": निराश परिस्थितियों का संरक्षक

रोमन कैथोलिक परंपरा में संत यहूदा तद्दै को "असंभव और निराश परिस्थितियों का संत" माना जाता है। परंपरा में एक कारण यह बताया जाता है कि उसका नाम यहूदा इस्करियोती से मिलता-जुलता होने के कारण लोग उससे प्रार्थना करने से हिचकते थे। फलस्वरूप जब लोग अंतिम सहारे के रूप में उसे पुकारने लगे, तो वह निराश लोगों का संत कहलाने लगा।

पश्चिमी चर्चों में उसका पर्व दिवस 28 अक्टूबर है, जिसे शमौन कनानी के साथ मनाया जाता है।

यह श्रद्धा की एक परंपरा है। बाइबल यह शिक्षा नहीं देती कि किसी चेले से प्रार्थना की जाए। प्रोटेस्टेंट और कई अन्य मसीही समुदाय संतों से प्रार्थना की प्रथा को नहीं मानते। आप चाहे जिस परंपरा से हों, इस भेद को समझना ज़रूरी है।

9. यहूदा तद्दै के जीवन से सीख

  1. सवाल पूछना गलत नहीं: यहूदा ने जो समझ में नहीं आया, वह सीधे यीशु से पूछा, और उसे गहरा उत्तर मिला।
  2. परमेश्वर साधारण लोगों को चुनता है: बाइबल में बहुत कम जगह मिलने पर भी वह उन बारह में था जिन्हें यीशु ने स्वयं चुना।
  3. प्रेम और आज्ञाकारिता: यूहन्ना 14:23 का उत्तर आज भी हर विश्वासी के लिए है कि परमेश्वर का निवास प्रेम और आज्ञा-पालन में है।
  4. कम चर्चित होना कम महत्वपूर्ण होना नहीं: परमेश्वर की सेवा में हर व्यक्ति की जगह है, चाहे इतिहास उसका नाम कम ही दर्ज करे।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

यहूदा तद्दै कौन था? वह यीशु के बारह चेलों में से एक था, जिसे नए नियम में "याकूब का (पुत्र) यहूदा" कहा गया है और परंपरा में तद्दै नाम से भी जाना जाता है।

क्या यहूदा तद्दै और यहूदा इस्करियोती एक ही हैं? नहीं। इस्करियोती ने यीशु को पकड़वाया, जबकि तद्दै वफादार चेला रहा। यूहन्ना 14:22 में दोनों को अलग बताया गया है।

क्या यहूदा तद्दै ने यहूदा की पत्री लिखी? परंपरा में यह भ्रम रहा है, पर अधिकतर विद्वान पत्री के लेखक (यीशु के भाई) को उससे अलग मानते हैं।

यहूदा तद्दै की मृत्यु कैसे हुई? बाइबल में कुछ नहीं लिखा। परंपरा के अनुसार वह फारस में शहीद हुआ, पर यह ऐतिहासिक रूप से पक्का नहीं है।

संत यहूदा का पर्व कब है? पश्चिमी चर्चों में 28 अक्टूबर को।

निष्कर्ष

यहूदा तद्दै के बारे में बाइबल की जानकारी कम है: वह यीशु का चुना हुआ चेला था, उसने एक गहरा सवाल पूछा, और पुनरुत्थान के बाद वह प्रार्थना करने वाले समूह में था। बाकी बातें परंपराओं से आती हैं, जिन्हें श्रद्धा और इतिहास के बीच संतुलन से समझना चाहिए। यदि यह लेख आपको उपयोगी लगा हो, तो इसे दूसरों के साथ साझा करें और नीचे कमेंट में अपने विचार बताएँ।

संदर्भ (References)

बाइबल के पद

  • मत्ती 10:3; 13:55
  • मरकुस 3:18
  • लूका 6:12-16
  • यूहन्ना 6:71; 14:21-23
  • प्रेरितों के काम 1:13-14
  • यहूदा 1:1, 17
  • उत्पत्ति 29:35

अन्य स्रोत

  • यूसेबियस, Ecclesiastical History (चर्च का इतिहास), पुस्तक 1, अध्याय 13
  • चर्च की प्राचीन परंपराएँ (अर्मेनियाई चर्च, रोमन कैथोलिक संत-परंपरा)
शालोम,
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