यशायाह 32:18 - मेरी प्रजा शांति के स्थानों में निश्चिंत बसेगी: घर में सच्ची शांति कैसे मिलती है?
नया
नियम - मुख्य वचन: "जिस किसी
घर में जाओ, पहिले कहो, कि इस घर में
शांति हो।" (लूका 10:5)
आज वह
कहता है: "मैं तुम्हारे घर में शांति बनना चाहता
हूँ।" जब यीशु ने अपने 70 चेलों को भेजा, तो उन्होंने बड़े भवन नहीं बनाए। वह घर-घर गए और एक ही संदेश दिया: शांति
का संदेश।
दुनिया
अस्थायी शांति देती है - पैसा, मनोरंजन, ध्यान भटकाना। पर यीशु ऐसी शांति देता है
जो तूफान में भी टिकी रहती है।
आज
आपके लिए 3 बातें:
1. शांति एक
एहसास नहीं, एक व्यक्ति है।
यीशु
खुद हमारी शांति है। इफिसियों 2:14 कहता है, "वही हमारी शांति है।" आपको अपने घर में
शांति बनानी नहीं है। आपको शांति के राजकुमार - यीशु को अपने घर में बुलाना है।
जब वह आता है, तो झगड़े शांत होते हैं, चिंता चली जाती है, नींद मीठी हो जाती है।
2. आपके शब्द
आपके घर में शांति ला सकते हैं।
नीतिवचन
15:1
- "कोमल उत्तर से जलजलाहट टल जाती है।" परमेश्वर ने आपको आशीष देने का अधिकार दिया है। आज चिंता की बातें कहने
के बजाय, अपने घर पर आशीष बोलें। कहें: "इस घर
में परमेश्वर की शांति रहेगी।" आपके शब्द बीज हैं।
3. आपके घर से
शांति बाहर निकलेगी।
जब एक
घर परमेश्वर की शांति पाता है, तो वह पूरे मोहल्ले के लिए
शांति का स्रोत बन जाता है। मरकुस 1 के पतरस के घर की तरह,
आपका घर भी एक घरेलू कलीसिया बन सकता है - जहाँ बीमार, अकेले और थके हुए लोग विश्राम पाएं। पुनरुत्थान शुरू करने के लिए
परमेश्वर को बड़े हॉल की जरूरत नहीं। उसे बस एक शांतिमय घर चाहिए।
आज
की प्रार्थना: हे शांति के राजकुमार प्रभु यीशु, आज मैं तेरी शांति को अपने घर में बुलाता/बुलाती हूँ। हर डर, हर लड़ाई, हर चिंता इस घर से निकल जाए। तेरी
उपस्थिति यहाँ राज करे। मेरे घर को विश्राम का स्थान बना, तनाव
का नहीं। मुझे आज किसी ऐसे व्यक्ति तक तेरी शांति पहुँचाने के लिए इस्तेमाल कर
जिसके पास शांति नहीं है। यीशु के नाम में, आमीन।
आज
का काम: आज अपने घर के हर कमरे में 30 सेकंड जोर से प्रार्थना करें और कहें: "यीशु के नाम में इस
घर में शांति हो।" फिर यह शांति एक परिवार को मैसेज करें।
परमेश्वर
की शांति आज आपके हृदय और आपके घर की रखवाली करे। आमीन।
शालोम,
- P. R. Jharbade

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