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होरेब नाम के पहाड़ पर मूसा

  होरेब नाम के पहाड़ पर मूसा 

(निर्गमन 3:​1-22; 4:​1-20)

मूसा भेड़ों को चराते-चराते बहुत दूर होरेब नाम के पहाड़ पर आ गया। वहाँ उसने देखा कि एक झाड़ी में आग लगी हुई है, मगर वह जलकर राख नहीं हो रही है!

मूसा सोच में पड़ गया: ‘यह तो बड़ी अजीब बात है। पास जाकर देखता हूँ।’ जब वह पास गया तो झाड़ी में से एक आवाज़ आयी: ‘रुक जा। अपनी चप्पलें उतार दे। क्योंकि तू जिस जगह पर खड़ा है, वह पवित्र है।’ मूसा ने तुरंत अपनी चप्पलें उतार दीं और अपना मुँह ढक लिया। जानते हैं यह आवाज़ किसकी थी? एक स्वर्गदूत की। लेकिन वह अपनी तरफ से नहीं बोल रहा था। यह सब बोलने के लिए परमेश्वर ने उससे कहा था।

परमेश्वर ने आगे कहा: ‘मैंने देखा है कि मिस्र में मेरे लोग बहुत तकलीफ में हैं। इसलिए मैंने उन्हें मिस्र से आज़ाद करने का फैसला किया है। और इस काम के लिए मैं तुझे मिस्र भेजना चाहता हूँ।’ यहोवा इस्राएलियों को मिस्र से निकालकर कनान देश में ले जानेवाला था, जो बहुत ही सुंदर देश था।

लेकिन मूसा ने कहा: ‘मैं तो मामूली इंसान हूँ। यह सब मैं कैसे कर पाऊँगा? अगर मैं चला भी गया और वहाँ कहीं इस्राएलियों ने मुझसे पूछा कि “तुम्हें किसने भेजा है?” तब मैं क्या जवाब दूँगा?’

परमेश्वर ने कहा: तुम उनसे यह कहना, “मुझे इब्राहीम के परमेश्वर, इसहाक के परमेश्वर और याकूब के परमेश्वर, यहोवा ने तुम लोगों के पास भेजा है।” ’ फिर यहोवा ने कहा: ‘मेरा नाम हमेशा के लिए यही रहेगा।’

मूसा ने कहा: ‘पर मान लो, मेरे यह कहने पर भी कि तुमने मुझे भेजा है, वे मुझ पर यकीन न करें, तब?’

इस पर परमेश्वर ने मूसा से पूछा: ‘तुम्हारे हाथ में क्या है?’

मूसा ने कहा: ‘लाठी।’

परमेश्वर ने कहा: ‘उसे ज़मीन पर डाल दो।’ जब मूसा ने ऐसा किया, तो लाठी साँप बन गयी। फिर यहोवा ने मूसा को एक और चमत्कार दिखाया। उसने मूसा से कहा: ‘अपना हाथ, अपने कपड़े के अंदर डालो।’ मूसा ने वैसा ही किया। और जब उसने अपना हाथ कपड़े से बाहर निकाला तो वह बिलकुल सफेद हो गया, मानो उसे कोढ़ की भयानक बीमारी लग गयी हो। फिर यहोवा ने मूसा को तीसरा चमत्कार करने की शक्‍ति दी। आखिर में, यहोवा ने मूसा से कहा: ‘जब तुम ये सब चमत्कार दिखाओगे, तो इस्राएली मान लेंगे कि मैंने ही तुम्हें भेजा है।’

इसके बाद मूसा घर गया और यित्रो से कहा: ‘मैं मिस्र में अपने रिश्तेदारों के पास जाना चाहता हूँ, ताकि मैं उनका हाल-चाल जान सकूँ।’ इस पर यित्रो ने उसे जाने दिया। मूसा, यित्रो से अलविदा कहकर मिस्र के लिए निकल पड़ा।

क्या आप जानते है? 

  1. तसवीर में दिखाए पहाड़ का नाम क्या है?
  2. जब मूसा अपनी भेड़ों को चराने पहाड़ पर ले गया, तो उसने कौन-सी अजीब बात देखी?
  3. जलती हुई झाड़ी से क्या आवाज़ आयी? यह आवाज़ किसकी थी?
  4. जब परमेश्वर ने मूसा से कहा कि वह उसके ज़रिए अपने लोगों को मिस्र से छुड़ाएगा, तो मूसा ने क्या जवाब दिया?
  5. अगर इस्राएली मूसा से पूछते, ‘तुम्हें किसने भेजा है?’ तो इसका जवाब देने के लिए परमेश्वर ने मूसा को क्या बताया?
  6. मूसा यह कैसे साबित करता कि परमेश्वर ने ही उसे भेजा है?

क्या आप और जानते है? 

  • निर्गमन 3:​1-22 पढ़िए।

    अगर हमें लगता है कि हम परमेश्वर का काम करने के काबिल नहीं हैं, तो मूसा की कहानी से हमें कैसे भरोसा मिलता है कि यहोवा हमारी मदद ज़रूर करेगा? (निर्ग. 3:​11, 13; 2 कुरि. 3:​5, 6)

  • निर्गमन 4:​1-20 पढ़िए।

    मिद्यान में 40 साल बिताने पर मूसा के रवैए में क्या बदलाव आया? इससे वे भाई क्या सीख सकते हैं जो कलीसिया में ज़िम्मेदारी सँभालने के लिए आगे बढ़ रहे हैं? (निर्ग. 2:​11, 12; 4:​10, 13; मीका 6:8; 1 तीमु. 3:​1, 6, 10)

    यहोवा चाहे हमें अपने संगठन के ज़रिए ताड़ना क्यों न दे, मूसा की मिसाल से हम किस बात का भरोसा रख सकते हैं? (निर्ग. 4:​12-14; भज. 103:14; इब्रा. 12:​4-11)

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