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Showing posts with the label ईश्वरीय चंगाई के विभिन्न चरण

ईश्वरीय चंगाई के विभिन्न चरण - 6

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 विश्वास इस बात पर विश्वास करना है, कि जो कुछ मैंने प्रार्थना में भाग है, वह मुझे मिल गया है। इसी को ‘‘विश्वास’’ कहते है। कई लोग बरसों से परमेश्वर की प्रतिज्ञा की हुई आशीषों के लिये प्रार्थना करते है, किन्तु जब तक वे उसे देख न लें या अनुभव न कर लें। यह विश्वास नहीं करते कि जो कुछ हमने मांगा है, वह हमें मिल गया है, यह तो विश्वास नहीं है।  विश्वास का अर्थ है, कि जिस बात के लिये परमेश्वर ने प्रतिज्ञा की है, और आपने प्रार्थना की है, वह हो गई। इसके पहले कि आप उसे प्रत्यक्ष रूप से देखें या अनुभव करें। वह आपके मिल गई है। ‘‘ऐसा विश्वास केवल परमेश्वर की प्रतिज्ञा पर ही आधारित है’’। यही पर आपको स्वाभाविक मन एंव आपका विश्वास, महानतम संघर्ष करते है। यही आपके तर्क (बुद्धि) एंव परमेश्वर के वचन का राणक्षेत्र है।  आप आरोग्य के लिये प्रार्थना करते है। किन्तु कभी-कभी उत्तर तुरन्त नहीं मिलता है। प्रार्थना के बाद आप पीड़ा या बुखार का अनुभव करते है। परमेश्वर का वचन कहता है।’’ उसके कोड़े खाने से तुम चंगे हुए’’तर्क यह कहता है कि रोग अभी भी है। यदि पर आप को तर्क को छोड़ना है, और परमेश्वर के वचन पर ...

ईश्वरीय चंगाई के विभिन्न चरण - 7

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  अस्वस्थ्य (रोग, बीमारी) का आविर्भाव अनेक रोग, शोक, संताप, बन्धन क्लेश, मृत्यु, ये सब मनुष्य के पाप रूपी वृक्ष के फल हैं। रोग-मृत्यु और पाप का एकत्व का सम्बन्ध है। हम इन्हें एक दूसरे से अलग नहीं कर सकते। पवित्रशास्त्र बाइबल कहता है।  परन्तु प्रत्येक व्यक्ति अपनी ही अभिलाषा से सिंचकर और फंसकर परीक्षा में पड़ता है। फिर अभिलाषा गर्भवती होकर पाप को जनती है, और पाप जब बढ़ जाता है तो मृत्यु को उत्पन्न करता है। ( याकूब 1ः14-15 ) पाप के कारण ही मनुष्यों में रोग-मृत्यु आई। एक ऐसी मृत्यु, जो कि मनुष्य की आत्मा को, अपने सृजनहार परमपिता परमेश्वर, जीवन ज्योति एंव शाश्वत परमधाम (स्वर्गिक जीवन) से रहित कर देती है। दूसरे शब्दो में इसी का नाम नरक है। ब्रम्हमोनिषद 2ः4 कहती है- ‘‘पाप का फल नरकादिमास्तु’’ । अर्थात पाप का प्रतिफल अनन्त नरक है। पवित्रशास्त्र बाइबल कहता है:  क्योंकि पाप की मजदूरी मृत्यु है। ( रोमियों 6ः23 ) पवित्रशास्त्र बाइबल में उत्पत्ती नामक प्रथम पुस्तक के अध्याय 1 से 3 अध्यायों पाप और आत्मिक मृत्यु का विश्वासनीय वृतान्त प्रकट करता है, कि हमारे आदि माता-पिता (आदम-हव्वा) को प...

ईश्वरीय चंगाई के विभिन्न चरण - 5

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 प्रार्थना  प्रार्थना सारी समसयाओं का निवारण एंव सामाधान हैं विश्वास के साथ मांगी गई प्रार्थना का यह अर्थ नही है, कि आप आरोग्यता के लिये दया की भीख मांगी जाये। याद रखे यदि आपने मसीह यीशु को अपना निजी उद्धारकर्ता स्वीकार किया है, तो आप परमेश्वर की सन्तान है, और वह आपका पिता है, तो आप परमेश्वर की निज सन्तान है, और वह आपका पिता है। आप कोई भिखारी नहीं है। जैसे एक बालक अपने माता-पिता के पास जाता है। वैसे ही आपका स्वर्गीय पिता चाता है, कि आप दृढ़ विश्वास के साथ उसके पास जांए। उसने आपकों स्वस्थ करने की प्रतिज्ञा दी है। अतः वह आपको स्वस्थ करना चाहता है। परमेश्वर पिता; पिता की भांती आपको स्वस्थ, सुखी एंव सवल देखना चाहता है।  भक्त दाऊद कहता है -  जैसे पिता अपने बालकों पर दया करता है, वैसे ही यहोवा परमेश्वर भी अपने डरवैयों पर दया करता है। ( भजन 103ः13 ) अतःआप निडर होकर साहस के साथ अनुग्रह के सिंहासन के समीप आयें। प्रभु यीशु ने कहा -  यदि तुम मुझ में बने रहो, और मेरा वचन तुम में बना रहे, तो जो चाहो मांगो और वह तुम्हारें लिये हो जाएगा। ( यूहन्ना 15ः7 ) प्रभु यीशु आपको प्रार...

ईश्वरीय चंगाई के विभिन्न चरण - 4

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 ईश्वरीय आरोग्यता उद्धार का भाग है  जिस प्रकार हम स्वास्थ्यकर्ता परमेश्वर को उद्धारकर्ता प्रभु यीशु मसीह से अलग नही कर सकते, क्योंकि दोनों एक ही तत्व है।  यीशु ने कहा - ‘‘मैं और पिता एक हैं। ( यूहन्ना 10ः30 )  यीशु ने उससे कहा - हे फिलिप्पुस मैं इतने दिन तुम्हारे साथ हूं, और क्या तू नही जानता? जिसने मुझे देखा, उसने पिता को देखा है, तू क्यों कहता है कि पिता को हमें दिखा? ( यूहन्ना 14ः9 ) क्योंकि उसमें ईश्वरत्व की सारी परिपुर्णता सदेह वास करती है। ( कुलुस्सियोें 2ः9 ) इसी प्रकार से ईश्वरीय आरोग्यता और उद्धार को एक दुसरे से लग नही कर सकते। यदि आप शारीरिक आरोग्यता चाहते है। तो आपको आत्मिक आरोग्यता भी ग्रहण करना चाहिए। यदि आप शारीरिक चंगाई चाहते है, तो आपको स्वास्थकर्ता और उद्धारकर्ता प्रभु यीशु मसीह को अपने जीवन में प्रवेश देना चाहिए।  प्रभु यीशु ने उस झोले के मारे हुए व्यक्ति से कहा - हे पुत्र तेरे पाप क्षमा हुए, अपनी खाट उठा और अपने घर चला जा। ( मरकुस 2ः5 और 11 ) यहां पापों की क्षमा पहले मिली, और बाद में रोग का निवारण हुआ। चंगाई की वाचा से संबन्धित परमेश्वर की श...

ईश्वरीय चंगाई के विभिन्न चरण - 3

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  शैतान आपको दुःखी रखना चाहता है। परमेश्वर आपको स्वस्थ करना चाहता है। परन्तु केवल शैतान ही आपके रोगी और दुःखी रखना चाहता है। आदि से ही शैतान परमेश्वर और परमेश्वर के सृजन कार्यो का विरोध रहा है। बाइबल में उत्पत्ती नामक प्रथम पुस्तक का वृतान्त प्रकट करता है कि हमारे आदि माता पिता (आदम-हव्वा) जिन्हें परमेश्वर ने अपनी समानता और अपने ही स्वरूप में उत्पन्न किया। उन्हें शैतान ने अपनी धुर्त चाल से उन्हें परमेश्वर की जीवन की आज्ञा से बहका कर, रोग, शोक, संताप, क्लेश बन्धन, मृत्यु दूसरे शब्दों में इसी का नाम नरक है, को स्वीकार करने के लिये मजबुर कर दिया, और अनन्त काल के लिये अपने सृजनहार यहोवा परमेश्वर पिता से दूर कर दिया।  मसीह यीशु से स्वर्गीय चंगाई प्राप्त करने के लिये कई लोगों के विश्वास में, यह विचार बाधा बनी है, कि रोग, बीमारियों और दुःख आदि परमेश्वर की ओर से है, और परमेश्वर ने दिया है। इन विचारों से हजारों लोग पीड़ित रहने से समय के पूर्व ही मर जाते है।  इन विचारों से अपने मानव मस्तिष्क को स्वच्छ करते हुए समझना है कि ये बाते परमेश्वर की ओर से नही हैं, वरन शैतान की ओर से है। और ...

ईश्वरीय चंगाई के विभिन्न चरण - 2

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 आरोग्यता प्राप्ति के लिये परमेश्वर की प्रतिज्ञायें।  पवित्र शास्त्र बाइबल में चंगाई की सब प्रतिज्ञायें आपके व्यक्तिगत जीवन के लिये है। जब आप बाइबल पढ़ते है तो ध्यान रखें कि आप प्रभु से उसके साथ व्यक्तिगत वार्तालाप कर रहे है। परमेश्वर के लिखित वचन की पूर्ण सत्यता ही दृढ़ विश्वास का एक मात्र आधार है। आप परमेश्वर को उसके पवित्र वचन से अलग नही कर सकते। वह न केवल इसमें है या इसका एक भाग है, परन्तु इसका आधार है और इसका समर्थन करता है, और इसे पुरा भी करता है। स्वर्गदूत ने कहा था - जो वचन परमेश्वर की ओर से होता है, वह प्रभाव रहित नही होता ( लूका 1ः37 ) बाइबल में जितनी भी प्रतिज्ञायें हैं, उनके द्वारा परमेश्वर अपने व्यक्तिगत रूप से बातें करता है। ये प्रतिज्ञायें, मानों उस चैक (धनादेश पत्र) के समान है, जो आपके नाम पर काटा गया है। आप उस चैक को बैंक में भुना सकते है। क्योंकि वह आपके नाम पर है। इसी प्रकार आप परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं को भी प्रार्थना में इसलिये ले सकते है, क्योंकि वे आपके लिये हैं।  परमेश्वर ने आपको व्यक्तिगत रूप से चंगाई देने के लिये प्रतिज्ञा किया है। क्या आप विश्वास कर...

ईवरीय चंगाई के विभिन्न चरण - 1

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चंगाई और उद्धार के लिये परमेश्वर की प्रतिज्ञा।  1. परमेश्वर स्वस्थकर्ता बाइबल के समस ही से परमेश्वर की सामथ्र्य से रोगी स्वस्थ हुए। अन्धों को दृष्टि मिली, बहिरों को सुनने की शक्ति, अपंग चलने लगे, कोढ़ी शुद्ध हुए, एंव सब प्रकार के रोगी व पीड़ित लोग स्वस्थ हुए ये आश्चर्यकर्म आज भी कलीसिया के लिये उतने ही आवश्यक तथा महत्वपूर्ण हैं, जितना की पूर्व काल के समय में थे। हमें यह क्यों जानना चाहिए? क्योंकि ईश्वरीय चंगाई से परमेश्वर की महिमा होती हैं। यदि तु अपने परमेश्वर यहोवा का तन मन से सुनें, और उसकी दृष्टि में ठीक है, वही करें और उसकी आज्ञाओं पर कान लगाए, और उसकी सब विधियों को माने, तो जितने रोग मैंने मिस्रियों पर भेजे हैं, उनमें से एक भी तुम पर न भेजूंगा, क्योंकि मैं तुम्हारा चंगा करनेवाला यहोवा हूँ। ( निगर्मन 15ः26 ) वही तो तेरे सब अधर्म को क्षमा करता और तेरे सब रोगों को चंगा करता है। ( भजन संहिता 103ः3 ) वह अपने वचन के द्वारा उनको चंगा करता और जिस गड़हे में पड़े है, उससे निकालता है। ( भजन संहिता 107ः20 ) धन्य है प्रभु जो प्रतिदिन हमारा बोझ उठाता है, वही हमारा उद्धारकर्ता परमेश्वर है। वही ...