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प्रभु यीशु मसीह परमेश्वर का पुत्र है।

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प्रभु यीशु मसीह परमेश्वर का पुत्र है। जो कोई यह मान लेता है, कि यीशु परमेश्वर का पुत्र हैः परमेश्वर उसमें बना रहता है, और वह परमेश्वर में। (1यूहन्ना 4ः15) क्योंकि उसमें ईश्वरत्व की सारी परिपूर्णता सदेह वास करती है। (कुलुस्सियों 2ः9) क्योंकि हमारे लिए एक बालक उत्पन्न हुआ, हमें एक पुत्र दिया गया हैः और प्रभुता उसके कान्धे पर होगी, और उसका नाम अद्भुत युक्ति करने वाला पराक्रमी परमेश्वर, अनन्त काल का पिता, और शान्ति का राजकुमार रखा जाएगा। (यशायाह 9ः6) वह बोल ही रहा था, कि देखो उजले बादल ने उन्हें छा लिया, और देखोः उस बादल में से यह शब्द निकला, कि यह मेरा प्रिय पुत्र है, जिसमें मैं प्रसन्न हूँ; इस की सुनो। (मत्ती 17ः5) स्वर्गदूत ने उसको उत्तर दिया; कि पवित्र आत्मा तुझ पर उतरेगा, और परमप्रधान की सामर्थ तुझ पर छाया करेगी इसलिये वह पवित्र जो उत्पन्न होनेवाला है, परमेश्वर का पुत्र कहलाएगा। (लूका 1ः35)

प्रभु यीशु समीह का दिव्य स्वरूप

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 प्रभु यीशु समीह का दिव्य स्वरूप यह सब कुछ इसलिये हुआ कि जो वचन प्रभु ने भविष्यवक्ता के द्वारा कहा गया था; वह पूरा हो कि, देखो ऐ कुंवारी गर्भवती होगी और एक पुत्र जनेगी उनका नाम इम्मानुएल रखा जाएगा जिसका अर्थ यह है ‘‘परमेश्वर हमारे साथ’’। (मत्ती 1ः22,23) आदि में वचन था, और वचन परमेश्वर के साथ था, और वचन परमेश्वर था।.... और वचन देहधारी हुआ; और अनुग्रह और सच्चाई से परिपूर्ण होकर हमारे बीच में डेरा किया, और हमने उसकी ऐसी महिमा देखी, जैसी पिता के एकलौते की महिमा। (यूहन्ना 1ः1 और 14) और इसमें सन्देह नही कि भक्ति का भेद गम्भीर है; अर्थात वह जो शरीर में प्रगट हुआ, आत्मा में पापी ठहरा, स्वर्गदूतों को दिखाई दिया, अन्यजातियों में उसका प्रचार हुआ, जगम में उस पर विश्वास किया गया, और महिमा में ऊपर उठाया गया। (1तीमुथियुस 3ः16) यीशु ने उससे कहाः हे फिलिप्पुस, मै इतने दिन से तुम्हारे साथ हूँ, और क्या तू मुझे नही जानता? जिसने मुझे देखा है उसने पिता को देखा है; तू क्यों कहता है कि पिता को हमें दिखा। क्या तू प्रतीति नहीं करता, कि मैं पिता मे हूँ और पिता मुझ में है?  (यूहन्ना 14ः9,10अ)

परमेश्वर का प्रेम

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 परमेश्वर का प्रेम  परन्तु परमेश्वर हम पर अपने प्रेम की भलाई इस रीति से प्रगट करता है, कि जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिये मरा। (रोमियों 5ः8) फसह के पर्व से पहिले जब यीशु ने जान लिया, कि मेरी वह घड़ी आ पहुंची है कि जगत छोड़कर पिता के पास जाऊं, तो अपने लोगों से, जो जगत में थे, जैसा प्रेम वह रखता था, अन्त तक वैसा ही पे्रम रखता रहा। (यूहन्ना 13ः1) और यीशु मसीह की ओर जो विश्वासयोग्य साक्षी और मरे हुओं में से जी उठने वालों में पहिलौठा, और पृथ्वी के राजाओं का हाकिम है, तुम्हें अनुग्रह और शान्ति मिलती रहे; जो हम से प्रेम रखता है, और जिसने अपने लहू के द्वारा हमें पापों से छुड़ाया है। (प्रकाशित वाक्य 1ः5) क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम किया कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करें, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए। (यूहन्ना 3ः16) यहोवा ने मुझे दूर से दर्शन देकर कहा है। मैं तुझ से सदा प्रेम रखता आया हूँ; इस कारण मैं ने तुझ पर अपनी करूणा बनाए रखी है। (यिर्मयाह 31ः3)