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बाइबिल के आदेशों को याद रखें

  बाइबिल के आदेशों को याद रखें "मनुष्यों के मामलों में सबसे उच्च नियम और जिसे वह पसंद करता है, यहां तक कि उनमें से सबसे छोटा भी रखता है।" (दानिय्येल 4:17)। अतीत और वर्तमान इतिहास में, नबूकदनेस्सर, फिरौन, हेरोदेस, नीरो, स्टालिन, माओ, शी जिनपिंग, ओबामा और उनके वर्तमान प्रोटीज, अयातुल्ला, एर्दोगन और अब कई ईसाई देशों के नेताओं ने जूदेव-ईसाई के खिलाफ काम किया है। मूल्य लेकिन उन्होंने अनजाने में परमप्रधान के उद्देश्यों को आगे बढ़ाया है जो उनके माध्यम से अपनी शक्ति दिखाता है। (निर्गमन 6:1; रोमियों 9:17) 1. प्रार्थना:  केवल प्रार्थना न करें और अच्छा महसूस करें। कुछ करो। जब मूसा का साम्हना लाल समुद्र और पीछे फिरौन की सेना से हुआ, तब मूसा ने यहोवा की दोहाई दी। लेकिन परमेश्वर ने उसे डांटा और कहा कि प्रार्थना करना बंद करो और आगे बढ़ो। (निर्गमन14:15) । इसी तरह पिन्तेकुस्त के दौरान, शिष्यों ने न केवल प्रार्थना की बल्कि 3000 आत्माओं को बपतिस्मा दिया। 2. सुसमाचार की घोषणा करें:  इसके तुरंत बाद शिष्यों ने साहसपूर्वक जाकर सुसमाचार का प्रचार किया और चिन्हों और चमत्कारों के लिए और अधिक शक्ति...

प्रेरितों का विश्वास वचन

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  हम विश्वास करते है परमेश्वर सर्वशक्तिमान पिता पर ,  जो स्वर्ग और पृथ्वी का कर्ता है । हम विश्वास करते हैं यीशु मसीह पर जो उसका एकलौता पुत्र और हमारा प्रभु है । वह पवित्र आत्मा की शक्ति से गर्भ में आया कुमारी मरियम से जन्मा ,  पोन्त्य पिलात के अधिकार में दुख भोगा ,  क्रूस पर चढ गया ,  मर गया और गाड़ा गया ,  आत्माओं के लोक में उतर गया: तीसरे दिन मृतकों में से जी उठा ,  स्वर्ग पर चढ गया और सर्वशक्तिमान परमेश्वर पिता की दाहिनी ओर बैठा है। वहां से वह जीवितों और मृतकों का न्याय करने आयेगा । हम विश्वास करते हैं पवित्र आत्मा पर ,  एक पवित्र विश्वव्यापी कलीसिया पर ,  पवित्रों की सहभागिता पर ,  पाप क्षमा पर ,  मृतकों के पुनरुत्थान और अनन्त जीवन पर । ।  आमीन । । अगुवा :  हमारे पिता परमेश्वर और प्रभु यीशु मसीह की ओर से तुम्हें अनुग्रह और शान्ति मिले।

नाइसीन विश्वास वचन

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  अपना विश्वास स्वीकार करें । मैं विश्वास करता हूँ एक परमेश्वर सर्वशक्तिमान पिता पर। जो स्वर्ग और पृथ्वी और सब दृश्य और अदृश्य पदाथों का कर्ता है ।  मैं विश्वास करता हूं एक यीशु मसीह पर जो परमेश्वर का एकलौता पुत्र है । सर्व युगों से पहिले वह पिता से उत्पन्न हुआ, परमेश्वर से परमेश्वर, ज्योति से ज्योति, सत्य परमेश्वर से सत्य परमेश्वर । सृजा हुआ नही, पिता के साथ एक तत्व, जिसके द्वारा सब कुछ उत्पन्न हुआ । वह हम मनुष्यों के लिए और हमारे त्राण के लिए स्वर्ग से उतर आया । पवित्र आत्मा के द्वारा कुमारी मरियम से शरीरधारी हुआ और मनुष्य बना, पोन्त्य पिलात के अधिकार में हमारे लिए क्रूस पर चढाया गया, दुख भोगा कबर में रखा गया और पवित्र शास्त्र के अनुसार तीसरे दिन जी उठा, स्वर्ग पर चढ गया और पिता की दाहिनी ओर बैठा है और जीवितों और मृतकों का न्याय करने को महिमा के साथ फिर आयेगा। उसके राज्य का कभी अंत न होगा । मैं विश्वास करता हूँ पवित्र आत्मा पर, जो प्रभु और जीवन दाता है, वह पिता और पुत्र से निकलता है, पिता और पुत्र के साथ उसकी आराधना और महिमा होती है । उसने नबियों के द्वारा बातें की । मैं व...

प्राचीन-धर्मवृद्ध-बिशप-डीकन

प्राचीन-धर्मवृद्ध-बिशप-डीकन कलीसिया क्या है ? ‘‘...यीशु मसीह ने कहा कि मैं अपनी कलीसिया बनाऊंगा और अधोलोक के फाटक उस पर प्रबल न होंगे।’’ ( मत्ती 16ः 18 ) इसलिए कलीसिया का सिर और उसका कोने का पत्थर यीशु मसीह ही है। कलीसिया मात्र उसकी देह है। और सब कुछ उसके पांवों तले कर दिया: और उसे सब वस्तुओं पर शिरोमणि ठहराकर कलीसिया को दे दिया। यह उसकी देह है, और उसी की परिपूर्णता है, जो सब में सब कुछ पूर्ण करता है। ( इफिसियों 1ः 22-23 ) प्रभु के पैर अर्थात् कलीसिया तले सारे प्रधान्ताएं, और अधिकार, सामर्थ, प्रभुता और हर एक नाम जो इस लोक में और आने वाले लोक में लिया जायेगा व सब कलीसिया के नीचे कर दिया है जिससे वह शैतान के सिर को कुचले और फैल कर सारी दुनिया को भर दे। ( रोमियों 16ः 20 ) एक अन्य जाति के व्यक्ति ने कलीसिया की परिभाषा देते हुए कहा कि कलीसिया वह स्थान है जहां हालेल्लू वाले हर सप्ताह हल्ला करते है। उन्हें स्वर्ग जाने कि बड़ी चिन्ता है परन्तु अपने पड़ोस की उन्हें कोई चिन्ता नहीं है। नए नियम में यूनानी शब्द (मासमेपं) का अनुवाद मंडली या सभा होता है। नए नियम में चर्च शब्द का सम्बन्ध कभी किसी भवन...

प्रार्थना यात्रा के लिए कुछ सुझाव

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प्रार्थना यात्रा के लिए कुछ सुझाव लक्ष्य: याद रखिए कि आप अपने मालिक की सम्पत्ति की सुरक्षा और बलवन्त के सम्पत्ति को छीनने के लिए जा रहे हैं। 1. घर में निकलने के पहिले अपनी सुरक्षा के लिए एक ‘‘प्रार्थना कवच’’ जरूर बना लें अर्थात् अपने प्रार्थना साथियों को जता दीजिए जिससे वे अपको दुष्ट के आक्रमण से आपको बचा कर रखें। यदि आपका किसी विश्वासी या घराने के सदस्य के साथ कड़वाहट है तो पश्चाताप करके सभी सम्बन्ध ठीक कर लीजिए। परमेश्वर के सम्पूर्ण अस्त्र-शस्त्र धारण करके निकलें जैसे सत्य की कमर बंद, धार्मिकता की झिलम, शांति के सुसमाचार सुनाने की तत्परता के जूते, विश्वास की ढाल तथा उद्धार का टोप और वचन की तलवार। यह इसलिए आवश्यक है कि आपका संघर्ष मनुष्यों से नहीं परन्तु शैतान के शासकों, अधिकारियों और इस अधकारपूर्ण युग की सेनाओं से है इसलिए परमेश्वर के आधीन हो जाओ और शैतान वहां से दूर भाग जाएगा।( इफिसियों 6ः 10-18; याकूब 4ः 7 ) 2. तड़के सुबह या कभी भी घर से बाहर निकलते ही सृष्टिकर्ता परमेश्वर की महिमा कीजिए। उसने आकाश और पृथ्वी, पशु, पेड़, पौधों की अद्भुत रीति से सृष्टि की है। चिड़ियों के साथ गीत गाइ...

स्वर्ग के फाटक

स्वर्ग के फाटक जब याकूब वीरान में लुज़ नामक नगर के पास सो रहा था ता उसने सपने में स्वर्ग से पृथ्वी पर स्वर्गदूतों को एक सीढ़ी से उतरते चढ़ते देख। याकूब ने उस स्थान को बेतेल अर्थात् ‘‘परमेश्वर का घर’’ कहा। प्रभु यीशु ने नथानियेल से कहा कि तू मुझ पर स्वर्गदूतों को उतरता चढ़ता देखेगा ( यूहन्ना 1ः 51 )। अब आप परमेश्वर के चलते फिरते मंदिर हैं। ‘‘और मूरतों के साथ परमेश्वर के मन्दिर का क्या सम्बन्ध ? क्योंकि हम तो जीवते परमेश्वर के मन्दिर हैं; जैसे परमेश्वर ने कहा है कि मैं उन में बसूंगा और उन में चला फिरा करूंगा; और मैं इन का परमेश्वर हूंगा, और वे मेरे लोग होंगे।’’ ( 2 कुरिन्थियों 6ः 16 ) आप जिस घर में प्रवेश करते हो और वहां प्रभु यीशु की आराधना और महिमा होने लगती है तो परमेश्वर अपने स्वर्गदूत वहां आने जाने लगते हैं ( निर्गमन 23ः 20 )। और वह स्थान ‘‘परमेश्वर का घर’’ बन जाता है। पहले इस घर में दुष्टात्माएं आती जाती थी और लोगों को विनाश की ओर ले जाने की तैयारी में थी परन्तु अब इस स्थान से आपके पड़ोसी सीधा स्वर्ग जा सकते हैं। ‘‘और उपदेश करके उन से कहा, क्या यह नहीं लिखा है, कि मेरा घर सब जातियों...

लूका 10ः 1-12

लूका 10ः 1-12 1. इन बातों के बाद प्रभु ने सत्तर और शिष्यों को नियुक्त किया। जिस-जिस नगर और स्थान में यीशु स्वयं जाने वाले थे वहाँ उन्हें दो-दो करके अपने आगे भेजा। 2. यीशु ने उन से कहा, ‘‘पक्के खेत बहुत हैं, परन्तु मज़दूर थेड़े हैं। इसलिए खेत के स्वामी से प्रार्थना करो कि वह अपने खेत काटने के लिए मज़दूरों को भेजे। 3. जाओ, देखो, मैं तुम्हें भेड़ों के समान भेड़ियों के बीच में भेज रहा हूँ। 4. इसलिए न बटुआ, न झोला, न जूते लो, और न मार्ग में किसी को नमस्कार करो। 5. ‘‘जिस किसी घर में तुम प्रवेश करो वहाँ पहले कहो, ‘इस घर का कल्याण हो।’ 6. यदि उस घर में कोई कल्याण के योग्य (Huios Eirene = Sonof Peace= शांति का पुत्र) होगा, तो तुम्हारा कल्याण उस पर ठहरेगा, नहीं तो वह तुम्हारे पास लौट आएगा। 7. उसी घर में रहो। जो कुछ उन से मिले, वही खाओ-पीओ; क्योंकि मज़दूर को अपनी मज़दूरी मिलनी चाहिए। तुम घर-घर न फिरना। 8. ‘‘जब तुम किसी नगर में प्रवेश करो और वहाँ के लोग तुम्हारा स्वागत करें, तो जो कुछ तुम्हारे सामने परोसा जाए, वही खाओ। 9. उस नगर के बीमारों को स्वस्थ करो, और उनसे कहो, ‘परमेश्वर का राज्य तुम्हारे न...

अधोलोक के फाटक

अधोलोक के फाटक प्रभु यीशु ने कहा कि मैं अपनी कलीसिया बनाऊँगा और अधोलोक के फाटक उस पर प्रबल न होंगे। प्रभुजी ने अपनी कलीसिया को अधिकार दिया कि जो तुम बांधोगे वह स्वर्ग में बंधा हुआ है और जो तुम खोलोगे वह स्वर्ग में खुल हुआ है। ( मत्ती 16ः 18-19 ) व्यक्तिगत फाटक: अधोलोक के फाटक वे हैं जिनके द्वारा शैतानिक शक्तियां अधिकार के साथ अन्दर प्रवेश कती है। जब कोई अपने घर में दारू पीने या व्यभिचार करने का भ्रष्टाचार के धन का उपयोग करने या झूठ बोलने या टेलीविजन में अश्लील तस्वीर देखने या अन्धविश्वास द्वारा ऐसी शक्तियों को महिमा देते हैं तो ईश्वर हैं ही नहीं तो अधोलोक के फाटक खुल जाते हैं जिससे अशुद्ध आत्माएं प्रवेश करने लगती हैं। वे फाटक स्वेच्छा से खोले जाते हैं परन्तु बिना मध्यस्थता की प्रार्थना के बंद नहीं किए जाते। दुष्टात्माओं को यहाँ से प्रभु के नाम, वचन, लहु, अपनी गवाही और पवित्रात्मा की सामर्थ से बांधकर बाहर निकाला जाता है। यह हर एक साधारण विश्वासी का अधिकार है। ‘‘और विश्वास करनेवालों में ये चिन्ह होंगे कि वे मेरे नाम से दुष्टात्माओं को निकालेंगे।’’ ( मरकुस 16ः 17 ) प्रभुजी ने तो नरक में ज...

प्रभुजी द्वारा मनोनीत कलीसिया रोपण की विधि

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प्रभुजी द्वारा मनोनीत कलीसिया रोपण की विधि (लूका 10 पर आधारित) 1. पहले अपने ही जाति और मित्रों में भेजिए: मत्ती 10 और लूका 9 में प्रभुजी ने 12 शिष्यों को चंगाई और दुष्टात्माओं को खदेड़ कर निकाल भगाने का अधिकार दिया और उन्हें परमेश्वर का राज्य स्थापित करने के लिए इस्राएलियों के मध्य भेजा। लूका 10 में वे सत्तर लोगों को अन्य जातियों के मध्य भेज रहे हैं। 2. दो शिष्य पर्याप्त हैं: प्रभुजी ने सत्तर लोगों को परमेश्वर का राज्य स्थापित करने के लिए दो-दो जन के झुंड में भेज दिया। उन्होंने भीड़ को ले जाने की सलाह नहीं दी जो गलती हम अक्सर करते हैं। हमरा लक्ष्य फसल काटने के लिए मज़दूर तैयार करना है न कि भजन कीर्तन करना है। मज़दूर तैयार करने के लिए दो विश्वासी पर्याप्त हैं। ‘‘और इन बातों के बाद प्रभु ने सत्तर और मनुष्य नियुक्त किए और जिस जिस नगर और जगह को वह आप जाने पर था, वहां उन्हें दो-दो करके अपने आगे भेजा।’’ ( लूक 10ः 1 ) अन्ताकिया कि कलीसिया अन्य जातियों के मध्य सब से पहिली कलीसियास थी। उसके स्थापित होने के कुछ ही समय बाद उन्होंने पौलुस और बरनबास जैसे वरिष्ट दो मिशनरियों को कलीसिया रोपण के लिए भेज...