कलीसिया के कार्य / Functions of the Church
कलीसिया के कार्य / Functions of the Church ( प्रेरितों के काम 2ः36-47 के आधार पर / Based on ACTS 2: 37-47 ) 1. राज्य की घोशणा: (पद 36) पिन्तेकुस्त के दिन पतरस ने राज्य की घोशणा की जिसने लोगों के हृदय छेद दिये और वे पूछने लगे,‘‘हम क्या करें?’’ Announcing the Kingdom: (V. 37) On the Day of the Pentecost Peter announced the kingdom which pricked the hearts of the people and they asked what shall we do? 2. पष्चाताप (मन फिराना) और बपतिस्मा: (पद 38) पतरस ने वहंा उपस्थित हर एक जन से कहा,‘‘मन फिराओ (पष्चाताप करो) और बपतिस्मा लो’’, और 3000 लोगों ने आज्ञा मानी। कोई भी मनुश्य बिना पष्चाताप या मनफिराव के स्वर्ग के राज्य में प्रवेष नहीं कर सकता जिसके तुरन्त बाद बपतिस्मा लेना चाहिये। इसके लिये किसी व्यवसायिक पास्टर की आवष्ययकता नहीं है, क्योंकि प्रत्येक विष्वासी एक राजकीय याजक है। यहूदी रीति के अनुसार, महिलांए आपस में एक दूसरे को बपतिस्मा देती थी और दो विष्वासी वहां गवाह के रूप में होते थे। मसीहियत, मसीह से उत्पन्न लोगों का आन्दोलन है, और सभी विष्वासियों को पवित्रात्मा द्वार...