भूख, आज्ञाकारिता और नेतृत्व

 आज का मुख्य वचन

"यदि तुम आज्ञा मानकर मेरी सुनो, तो उस देश की उत्तम से उत्तम वस्तुएँ खाओगे" (यशायाह 1:19)

भूमिका: भूख केवल पेट की समस्या नहीं है । भूख हमें अधिकार से वंचित करती है, और जो भूखा होता है वह व्यवसायी या अगुवा नहीं, गुलाम बन जाता है । बाइबल में इसके उदाहरण भरे पड़े हैं ।

भाग 1: भूख हमें गुलामी की ओर ले जाती है ।

1. मिस्र के लोग (उत्पत्ति 47:13-26)

अकाल में मिस्रवासियों ने पहले पैसा, फिर पशु, फिर ज़मीन और अंत में स्वयं को रोटी के बदले बेच दिया । उन्होंने कहा, "हमें और हमारी भूमि को भोजन के बदले मोल ले लो, हम फ़िरौन के दास होंगे" (47:19) । भूख ने अधिकार छीना और गुलामी दी ।

2. याकूब का परिवार (उत्पत्ति 46:1-4; निर्गमन 1:8-14; 12:40)

भूख के कारण याकूब का परिवार मिस्र गया । यूसुफ के जीते जी वे सम्मान से रहे, परन्तु जब "यूसुफ को न जानने वाला नया राजा" उठा (निर्गमन 1:8), तब नेतृत्व का अधिकार चला गया और 430 वर्ष की गुलामी आई ।

3. एसाव (उत्पत्ति 25:29-34)

एक कटोरा दाल के लिए एसाव ने जेठा होने का अधिकार बेच दिया । भूख ने उसकी विरासत छीन ली ।

4. जंगल में इस्राएली (गिनती 11:4-6)

भूख लगने पर वे मिस्र की गुलामी का भोजन याद करके लौटना चाहने लगे । गुलामी की मानसिकता भूख से ही पनपती है ।

भाग 2: कारण: अनाज्ञाकारिता (शत्रु की सामर्थ)

व्यवस्थाविवरण 28 दोनों रास्ते दिखाता है:

•         आज्ञाकारिता: आशीष, भरे भण्डार, "तू सिर होगा, पूँछ नहीं" (28:1-14)

•         अनाज्ञाकारिता: "तू भूख, प्यास और सब वस्तुओं की घटी में अपने शत्रुओं की सेवा करेगा" (28:47-48)

सम्बन्ध साफ़ है: अनाज्ञाकारिता → भूख → शत्रु के अधीन गुलामी ।

आज्ञाकारिता में:

1. अपने घर की भूख को भगाओ, परिवार जोड़ो, कलीसिया रोपण करो ।

2. शासन चलाओ और शिष्य बनाओ । हर क्षेत्र में लीडरशिप तैयार करो ।

अनाज्ञाकारिता में:

1. घर भूख और गुलामी की ओर जाता है । घर का बिखराव कलीसिया का बिखराव बन जाता है ।

2. हज़ारों वर्ष की गुलामी आती है, और नेतृत्व, अधिकार और सामर्थ शत्रु के हाथ में चली जाती है ।

भाग 3: आज्ञाकारिता से नेतृत्व आता है ।

यूसुफ (उत्पत्ति 39–41)

उसने पोतीपर के घर, बन्दीगृह और फिर पूरे मिस्र में आज्ञाकारिता और ईमानदारी से सेवा की । फ़िरौन ने कहा, "परमेश्वर का आत्मा जिसमें है, उसके समान कौन है?" (41:38) । यूसुफ का नेतृत्व इसलिए आया ताकि उसका परिवार और राष्ट्र भूख से बचे (उत्पत्ति 45:5-7; 50:20) ।

इसहाक (उत्पत्ति 26:1-12)

अकाल के समय परमेश्वर ने मिस्र जाने से रोका । इसहाक ने आज्ञा मानी, उसी देश में बोया और सौ गुना पाया ।

सारपत की विधवा (1 राजा 17:8-16) - आज्ञा मानने से मुट्ठी भर आटा और थोड़ा तेल कभी नहीं घटा ।

मन्ना (निर्गमन 16)

परमेश्वर ने रोज़ का भोजन दिया । आज्ञा मानने वालों को मिला, न मानने वालों का सड़ गया ।

भाग 4: हम क्या करें?

1. हर व्यवसाय में खड़े हों: पेट भरे, मेन्टरशिप तैयार करें, गर्भ गृह खोले व्यवसाई बने ।

•         लुदिया, कपड़े की व्यापारी । (प्रेरितों 16:14)

•         प्रिस्किल्ला और अक्विला, तम्बू बनाने वाले । (प्रेरितों 18:3)

•         "वही है जो तुझे धन प्राप्त करने की शक्ति देता है" । (व्यवस्थाविवरण 8:18)

2. शिक्षा के क्षेत्र में नेतृत्व तैयार करें: शिष्य बनाएँ

•         मूसा को मिस्र की सारी विद्या सिखाई गई । (प्रेरितों 7:22)

•         दानिय्येल ने बाबुल की शिक्षा पाई पर परमेश्वर के प्रति विश्वासयोग्य रहा । (दानिय्येल 1:4, 17-20)

•         "जाकर सब जातियों के लोगों को चेला बनाओ ।" । (मत्ती 28:19-20)

3. शासन में नेतृत्व तैयार करें ।

•         यूसुफ (मिस्र), दानिय्येल (बाबुल), नहेमायाह (फारस), एस्तेर (रानी)

•         "जब धर्मी वृद्धि पाते हैं तो प्रजा आनन्दित होती है" । (नीतिवचन 29:2)

•         हर क्षेत्र में ऐसे लोग हों जिनके पास ईमानदारी और परमेश्वर का भय हो ।

4. अपने लोगों का पेट भरें और भरोसा सिखाएँ कि पेट परमेश्वर भरेगा ।

•         "पहले परमेश्वर के राज्य और धर्म की खोज करो, तो ये सब वस्तुएँ तुम्हें मिल जाएँगी" । (मत्ती 6:25-33)

•         "मेरा परमेश्वर अपने धन के अनुसार तुम्हारी हर घटी पूरी करेगा" । (फिलिप्पियों 4:19)

•         भजन 37:25 और भजन 23

यह संदेश हमें क्या सिखाता है

1. भूख केवल पेट की समस्या नहीं, अधिकार की समस्या है ।

जो भूखा होता है, वह अपने अधिकार और निर्णय की स्वतंत्रता खो देता है । (उत्पत्ति 47:19; 25:34) ।

2. आज्ञाकारिता से नेतृत्व आता है ।

यूसुफ की आज्ञाकारिता से परमेश्वर ने उसे ऊँचा उठाया ताकि परिवार और देश भूख से बचे (उत्पत्ति 45:5-7) ।

3. अनाज्ञाकारिता से बिखराव और गुलामी आती है ।

व्यवस्थाविवरण 28:47-48 की चेतावनी साफ़ है । घर का बिखराव कलीसिया का बिखराव बन जाता है ।

4. परमेश्वर पेट भरता है । - मन्ना, सारपत की विधवा का आटा और तेल, और इसहाक की सौ गुनी उपज यही सिखाती है (फिलिप्पियों 4:19) ।

5. नेतृत्व हर क्षेत्र में तैयार करना है ।

व्यवसाय, शिक्षा और शासन, तीनों जगह ऐसे लोग चाहिए जो ईमानदारी और परमेश्वर के भय से खड़े हों और दूसरों को भी तैयार करें (मत्ती 28:19-20) ।

कार्य करें: आज निर्णय लीजिए

"आज तुम किसकी सेवा करोगे, इसे चुन लो... परन्तु मैं और मेरा घराना तो यहोवा की सेवा करेंगे ।"

(यहोशू 24:15)

आज का निर्णय केवल सुनने का नहीं, कार्य आरंभ करने का है । आज ही ये कदम उठाइए:

1. अपने घर की भूख मिटाने का कदम चुनिए । परिवार को जोड़िए, पारिवारिक प्रार्थना शुरू कीजिए, और आय का कोई स्रोत या कौशल बढ़ाने की योजना बनाइए ।

2. एक व्यक्ति को शिष्य या मेंटी चुनिए । किसी एक युवा या परिवार को चुनिए जिसे आप सिखाएँगे और नेतृत्व के लिए तैयार करेंगे ।

3. शिक्षा में निवेश कीजिए । अपने बच्चों और कलीसिया के बच्चों की शिक्षा और कौशल के लिए कोई ठोस पहल कीजिए ।

4. किसी भूखे का पेट भरिए । इस सप्ताह किसी एक जरूरतमंद को भोजन दीजिए और उसे सिखाइए कि परमेश्वर विश्वासयोग्य है ।

5. अपने क्षेत्र में ईमानदार नेतृत्व के लिए खड़े होइए । व्यवसाय, स्कूल या स्थानीय शासन में जहाँ आप हैं, वहाँ सेवा और ईमानदारी से प्रभाव बनाइए ।

मेरा निर्णय (अपने हाथ से भरें)

आज मैं यह निर्णय लेता/लेती हूँ कि:

1. मैं अपने घर में ______________________________ करूँगा/करूँगी ।

2. मैं ______________________ को शिष्य/मेंटी बनाऊँगा/बनाऊँगी ।

3. मैं इस सप्ताह ______________________ का पेट भरूँगा/भरूँगी ।

4. मैं ______________________ क्षेत्र में नेतृत्व के लिए तैयार होऊँगा/होऊँगी ।

हस्ताक्षर: ________________        दिनांक: ________________

प्रार्थना

हे प्रभु, हमें आज्ञाकारी बना, ताकि हमारे घर भूख और गुलामी से बचें और हम हर क्षेत्र में तेरे राज्य के लिए अगुवे बनें । हमारा पेट तू भरेगा, इस पर हमारा भरोसा बढ़ा । आमीन ।

शालोम, प्रभु आपको निर्णय लेने में सहायता करें आशिष देवे ।

आपको यह सन्देश कैसा लगा हमें पर्सनली हमें लिखें और सुझाव दीजिये,

प्रभु में सहभागी आपकी

महान आदेश और घरेलु कलीसिया


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