जैतून का पेड़

तुम्हारे घर के लिए परमेश्वर के 4 संदेश

मुख्य वचन: "इस्राएलियों को यह आज्ञा दे, कि मेरे पास उजियाला देने के लिये कूट के निकाला हुआ जलपाई का निर्मल तेल ले आना, कि दीपक नित्य जलता रहे।" (लैव्यवस्था 24:2)

आज का संदेश: परमेश्वर ने तुम्हारे घर के लिए जैतून को ही क्यों चुना? 

बाइबल में परमेश्वर ने आम या अंजीर का तेल नहीं मांगा, सिर्फ जैतून का मांगा। क्यों? क्योंकि जैतून के हर हिस्से में तुम्हारे घर के लिए एक भविष्यवाणी है।

परमेश्वर ने जैतून को 4 समय पर इस्तेमाल किया, और आज वही 4 काम वह तुम्हारे घर में करने जा रहा है।

1. पहला इस्तेमाल - शांति के लिए (उत्पत्ति 8:11) - जब तुम्हारा घर डूब रहा था

जब पूरी पृथ्वी जल-प्रलय में डूबी थी, तब परमेश्वर ने नूह को क्या भेजा? कबूतरी की चोंच में जैतून का नया पत्ता।

इसका अर्थ था - प्रलय खत्म, अब शांति शुरू।

आपके घर के लिए: पिछले महीनों में तुम्हारे घर में प्रलय आया - लड़ाई, कर्ज, बीमारी । तुम सोचते हो सब डूब गया। पर आज परमेश्वर तुम्हारे घर में जैतून का पत्ता भेज रहा है। यह इस बात का सबूत है कि तुम्हारे घर का प्रलय खत्म हो गया है, अब शांति का मौसम शुरू हो रहा है।

2. दूसरा इस्तेमाल - अभिषेक के लिए (1 शमूएल 16:13) - जब तुम्हारा घर छोटा समझा गया,

परमेश्वर ने शमूएल से कहा - सींग में जैतून का तेल भर ले और यिशै के घर जा। दाऊद तो जंगल में भेड़ चरा रहा था, कोई उसे राजा के लायक नहीं समझता था। पर उसी दिन शमूएल ने जैतून का तेल उसके सिर पर उंडेला और लिखा है - "उसी दिन से यहोवा का आत्मा दाऊद पर वेग से उतरा।"

आपके घर के लिए: दुनिया ने तुम्हारे घर को छोटा, आखिरी, अनपढ़ घर समझा। पर परमेश्वर सींग भरकर तेल लेकर तुम्हारे ही घर में आ रहा है। आज अभिषेक किसी महल में नहीं, तुम्हारी घरेलू कलीसिया में उंडेला जाएगा।

3. तीसरा इस्तेमाल - चंगाई और उजाले के लिए (लैव्यवस्था 24:2 और लूका 10:34)

उसी जैतून के तेल से दो काम होते थे -

अ) पवित्रस्थान का दीया नित्य जलता था।

ब) भले सामरी ने घायल के घावों पर वही तेल डाला।

आपके घर के लिए: तुम्हारे घर में दो चीजें एक साथ होंगी। एक तरफ तुम्हारे घावों पर चंगाई का तेल लगाया जाएगा, दूसरी तरफ तुम्हारे घर का दीया फिर से जल उठेगा, जिस घर में चंगाई है उसी घर में उजाला आता है।

4. चौथा इस्तेमाल - प्रार्थना और विजय के लिए (गतसमने - मत्ती 26:36)

गतसमनी शब्द का अर्थ है - "जैतून पेरने का कोल्हू"। यीशु को पकड़े जाने से पहले परमेश्वर उसी जैतून के बगीचे में ले गया । वहाँ यीशु कूटे गए, दबाए गए, पसीने में लहू बहाया - ताकि तुम कभी न कुचले जाओ।

आपके घर के लिए: तुम्हारा घर भी गतसमने जैसा लगता है - जहाँ तुम दबाए जा रहे हो। पर याद रखो, कोल्हू में जैतून खत्म नहीं होता, उसका तेल निकलता है। तुम्हारा दबाया जाना तुम्हारे घर के अभिषेक को निकालेगा।

आज की प्रार्थना: पिता, धन्यवाद कि तूने मेरे घर के लिए जैतून को चुना। आज मेरे घर में शांति का पत्ता भेज, मेरे माथे पर अभिषेक का तेल उंडेल, मेरे घावों पर चंगाई का तेल लगा, और मेरे घर के दीये को नित्य जला। जैसे तूने दाऊद के घर को चुना, वैसे मेरे घर को चुन ले। यीशु के नाम में, आमीन।

आज की घोषणा: अपने घर पर हाथ रखकर कहें - "मेरा घर प्रलय के बाद का घर नहीं, शांति का घर है! मेरा घर छोटा नहीं, अभिषिक्त घर है! मेरे घर में अब अंधेरा नहीं, क्योंकि मेरा दीया कूटे हुए निर्मल तेल से नित्य जलेगा!"

आज का कार्य: आज घर में जैतून का तेल (Olive Oil) लेकर 4 जगह लगाएँ -

1. मुख्य द्वार पर - कहें - यहाँ शांति आएगी।

2. बच्चों / परिवार के माथे पर - कहें - यहाँ अभिषेक आएगा।

3. जहाँ बीमार बैठते हैं - कहें - यहाँ चंगाई आएगी।

4. अपने प्रार्थना कोने में दीये में डालकर - कहें - यहाँ नित्य उजाला रहेगा।

शालोम,

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