पौलुस का बारहवाँ पत्र - तीतुस में,

मुख्य वचन:

"उसने अपनी ही दया के अनुसार, धार्मिकता के कामों के द्वारा नहीं, पर नए जन्म के स्नान और पवित्र आत्मा के नवीनीकरण के द्वारा हमारा उद्धार किया।" - (तीतुस 3:5)

1. पौलुस का बारहवाँ पत्र कौन सा है?

पौलुस का बारहवाँ पत्र है - तीतुस का पत्र। पिछले ग्यारह पत्र थिस्सलुनीके (दो), गलातिया, कुरिन्थुस (दो), रोम, इफिसुस, फिलिप्पी, कुलुस्से, फिलेमोन और 1 तीमुथियुस को गए थे।

यह भी 1 तीमुथियुस की तरह एक पास्टोरल पत्र है, एक व्यक्ति को लिखा गया, अपने सच्चे पुत्र तीतुस को (1:4), जो एक अन्यजाति विश्वासी था और पौलुस के साथ कई मिशन यात्राओं में शामिल रहा (गलातियों 2:1-3)। यह पत्र भी परम्परा के अनुसार पौलुस की कैद से छूटने के बाद, लगभग ई. 62-64 में लिखा गया।

पौलुस ने तीतुस को क्रेते द्वीप में छोड़ा था, ताकि वह "जो बातें अधूरी रह गई थीं उन्हें सुधारे, और नगर-नगर में अगुवे नियुक्त करे" (1:5)। क्रेते में उस समय की एक कहावत थी कि वहाँ के लोग "झूठे, दुष्ट पशु, आलसी पेटू" माने जाते थे (1:12), और पौलुस उसी संस्कृति में सुसमाचार को जड़ जमाने में तीतुस की मदद करना चाहता था।

1 तीमुथियुस की तरह यह पत्र भी घरों में मिलने वाली छोटी-छोटी संगतियों को व्यवस्थित करने की बात करता है, हर शहर में अगुवे नियुक्त करना, हर उम्र और वर्ग के लोगों को सिखाना।

2. इस बारहवें पत्र का मुख्य संदेश क्या है?

इस पत्र का एक ही प्रश्न है - सच्ची शिक्षा भले कामों में कैसे बदलती है? पौलुस बार-बार "भले काम" शब्द दोहराता है, यह पत्र का प्रिय शब्द है।

पौलुस इसका उत्तर 4 भागों में देता है:

अ) अगुवों की स्थापना (अध्याय 1)

पौलुस पहले अपने बुलावे को याद करता है: "अनन्त जीवन की आशा पर, जिसकी प्रतिज्ञा उस सच्चे परमेश्वर ने अनादि काल से की, और उसने ठीक समय पर अपना वचन प्रचार के द्वारा प्रगट किया" (1:2-3)। पौलुस के लिए हर सेवकाई इसी आशा से शुरू होती है।

फिर अगुवों की योग्यता, जो 1 तीमुथियुस 3 से मिलती-जुलती है: निर्दोष, एक ही पत्नी का पति, विश्वासयोग्य सन्तान वाला, नियंत्रित, पहुनाई करने वाला, भलाई का प्रेमी, धार्मिक, पवित्र, संयमी, और "खरी शिक्षा के अनुसार शिक्षा देने और विरोध करने वालों को समझाने में समर्थ" (1:6-9)।

क्यों इतनी सावधानी? क्योंकि "बहुत से लोग हैं जो अनुशासनहीन, बकवादी और धोखा देने वाले हैं... वे लाभ के लिये जो नहीं सिखाना चाहिए वह सिखाकर पूरे घरों को बिगाड़ देते हैं" (1:10-11)। घरेलू कलीसिया की कमज़ोरी यही है, गलत शिक्षा जल्दी फैल जाती है, इसलिए अच्छे अगुवे ज़रूरी हैं।

तुम्हारे घर के लिए: जो घर में अगुवाई करे, वह ऐसा हो जिसका जीवन उसकी शिक्षा से मेल खाए। और सावधान रहो, गलत शिक्षा पूरे घर को बिगाड़ सकती है।

ब) हर आयु वर्ग के लिए स्वस्थ शिक्षा (अध्याय 2:1-10)

अब पौलुस एक अनोखी बात करता है, वह हर उम्र और वर्ग को अलग-अलग निर्देश देता है, यानी शिक्षा एक जैसी नहीं, पर हर व्यक्ति की स्थिति के अनुसार होनी चाहिए (2:1-2):

  • बूढ़े पुरुष: संयमी, गंभीर, सुबुद्ध, विश्वास, प्रेम और धीरज में स्वस्थ
  • बूढ़ी स्त्रियाँ: पवित्रता में जीवन बिताने वाली, निन्दा न करने वाली, दाखरस की दासी नहीं, भली बातें सिखाने वाली, ताकि वे जवान स्त्रियों को सिखाएँ कि वे अपने पतियों और बच्चों से प्रेम रखें, संयमी और पवित्र हों, और घर का प्रबन्ध करें (2:3-5)
  • जवान पुरुष: संयमी बनें, और तीतुस खुद भले कामों का आदर्श बने (2:6-7)
  • सेवक: अपने स्वामियों के अधीन रहें, ताकि वे हमारे उद्धारकर्ता परमेश्वर की शिक्षा को हर बात में शोभा दें (2:9-10)

यहाँ एक सुन्दर सिद्धान्त छिपा है: बूढ़ी स्त्रियाँ जवान स्त्रियों को सिखाएँ। यानी घर और संगति में पीढ़ियाँ एक-दूसरे को थामें।

तुम्हारे घर के लिए: घर में हर उम्र वाले की अपनी भूमिका है। बुज़ुर्गों को छोटे-छोटे कामों के लिए मत बिठा दो, उन्हें सिखाने और थामने का काम दो। और जवान पीढ़ी सीखने के लिए खुली रहे।

स) अनुग्रह जो सिखाता है (अध्याय 2:11-15)

यहाँ पत्र का हृदय आता है: "क्योंकि परमेश्वर का वह अनुग्रह जो उद्धार का कारण है, सब मनुष्यों पर प्रगट हुआ है। वह हमें सिखाता है कि हम अभक्ति और सांसारिक अभिलाषाओं को त्यागकर संयम, धार्मिकता और भक्ति के साथ इस युग में जीवन बिताएँ" (2:11-12)।

ध्यान दीजिए: अनुग्रह सिर्फ बचाता नहीं, सिखाता भी है। अनुग्रह ढीला-ढाला जीवन नहीं देता, अनुशासित और पवित्र जीवन सिखाता है। और यह सब "उस धन्य आशा और महान परमेश्वर और हमारे उद्धारकर्ता यीशु मसीह की महिमा के प्रगट होने की बाट जोहते हुए" होता है (2:13)।

फिर मसीह के काम का सार: "उसने अपने आप को हमारे लिये दे दिया, कि वह हमें सब अधर्म से छुड़ाए और अपने लिये एक ऐसी विशेष प्रजा शुद्ध करे जो भले कामों में उत्साही हो" (2:14)। मसीह का उद्धार भी हमें भले कामों की ओर भेजता है।

तुम्हारे घर के लिए: अनुग्रह को बहाना मत बनाओ कि "चूँकि मैं बचाया गया हूँ, इसलिए मैं कैसे भी जी सकता हूँ।" सच्चा अनुग्रह घर में अनुशासन और पवित्रता सिखाता है।

द) दया से धुले, भले काम में लगे (अध्याय 3)

पौलुस याद दिलाता है कि हम भी पहले मूर्ख, अनाज्ञाकारी, भरमाए हुए, तरह-तरह की लालसाओं के दास, द्वेष और डाह में जीवन बिताने वाले, घिनौने और एक-दूसरे से बैर रखने वाले थे (3:3)। पर फिर हमारा मुख्य वचन आता है: "परन्तु जब हमारे उद्धारकर्ता परमेश्वर की दया और मनुष्यों के प्रति प्रेम प्रगट हुआ, तब उसने अपनी ही दया के अनुसार, धार्मिकता के कामों के द्वारा नहीं, पर नए जन्म के स्नान और पवित्र आत्मा के नवीनीकरण के द्वारा हमारा उद्धार किया" (3:4-5)।

यह वचन 2:8-9 जैसा है (अनुग्रह से, कामों से नहीं), पर यहाँ पौलुस आगे कहता है कि "जिन्होंने परमेश्वर पर विश्वास किया है, वे भले कामों में लगे रहने का ध्यान रखें" (3:8)। सिद्धान्त एक ही है: उद्धार कामों से नहीं, पर सच्चा उद्धार कामों की ओर ले जाता है।

अंत में वह बेकार बहसों से बचने को कहता है: "मूर्खतापूर्ण विवादों, वंशावलियों, झगड़ों और व्यवस्था के विषय के झगड़ों से बचे रह, क्योंकि ये निष्फल और व्यर्थ हैं" (3:9)। और हठधर्मी व्यक्ति से एक-दो बार समझाने के बाद अलग रहने को कहता है (3:10)।

तुम्हारे घर के लिए: याद रखो कि हम भी कभी बिगड़े हुए थे, इसलिए किसी को तुच्छ मत समझो। और घर की बातचीत बेकार बहसों में नहीं, भले कामों में लगे।

3. तुम्हारे घर के लिए 3 काम

  1. हर पीढ़ी को थामे रखो (2:1-6) - घर में बुज़ुर्गों को सिखाने और गवाही देने का मौका दो, और जवान पीढ़ी उनसे सीखने के लिए समय निकाले। हर उम्र का अपना योगदान है।

  2. अनुग्रह को बहाना नहीं, अनुशासन का कारण बनाओ (2:11-12) - इस सप्ताह अपने घर में एक ऐसी आदत चुनो जिसे अनुग्रह की शक्ति से सुधारना है, संयम, धार्मिकता या भक्ति में से किसी एक में।

  3. भले कामों में उत्साही बनो (2:14, 3:8) - परिवार के साथ मिलकर एक ठोस भला काम तय करो, जैसे किसी पड़ोसी की मदद या किसी ज़रूरतमंद के लिए कुछ करना, और इसे इसी हफ्ते पूरा करो।

आज की प्रार्थना:

"हे उद्धारकर्ता परमेश्वर, तूने अपनी दया से, हमारे कामों के कारण नहीं, हमें नए जन्म से धोकर बचाया है। हमारे घर को अपने अनुग्रह से अनुशासित और पवित्र जीवन जीना सिखा। हर पीढ़ी को अपनी जगह दे, बुज़ुर्गों को सिखाने का साहस और जवानों को सीखने की नम्रता दे। हमें भले कामों में उत्साही बना, जो तेरी धन्य आशा की बाट जोह रहे हैं। आमीन।"

आज की घोषणा:

"परमेश्वर की दया मुझ पर प्रगट हुई है! मैं धार्मिकता के कामों से नहीं, उसकी दया से नए जन्म पाया हूँ! मेरा घर भले कामों में उत्साही घर है! हम संयम, धार्मिकता और भक्ति में जीते हुए अपने उद्धारकर्ता की महिमा के प्रगट होने की बाट जोहते हैं!" (3:5, 2:12-13)

आज का कार्य:

आज परिवार के साथ बैठकर तीतुस 2:11-14 और 3:3-8 पढ़ें। हर एक व्यक्ति बताए कि "उद्धार से पहले मैं क्या था, और अब मसीह ने मुझे क्या बनाया?" फिर सब मिलकर इस हफ्ते किसी के लिए एक भला काम करने की योजना बनाएँ।

"अनुग्रह तुम सब के साथ रहे।" (3:15)

शालोम,

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