एक-दूसरे वाली कलीसिया
यदि आपके पास एक पवित्र इमारत है जिसे चर्च कहा जाता है, एक वेतनभोगी पास्टर है, प्रवचन है, संगीत वाद्ययंत्र हैं, रविवार की आराधना सेवा और दशमांश (टिथिंग) आदि हैं, तो आप नए नियम (New Testament) की कलीसिया के मॉडल के अनुरूप नहीं हैं । क्योंकि कलीसिया का मुख्य कार्य एक-दूसरे को शिक्षा देना है ताकि परमेश्वर का राज्य बढ़े और गुणा हो ।
मूलभूत अंतर यह है कि
जहाँ आधुनिक कलीसिया गीतों के द्वारा परमेश्वर की आराधना करने के लिए मिलती है,
वहीं
नये नियम की एक्लेसिया (Ecclesia) एक-दूसरे
को शिक्षा देने के लिए मिलती थी (1 कुरिन्थियों
14:26-32) । जहाँ आधुनिक कलीसिया संख्या
में वृद्धि करती है पुनरुत्पादन और स्थानांतरण के द्वारा, वहीं
नये नियम की एक्लेसिया खोए हुओं और तुच्छ समझे जाने वालों के परिवर्तन के द्वारा
बढ़ती और गुणा करती है । साथ ही, जहाँ
पारंपरिक कलीसिया में फीस देने वाले सदस्य होते हैं जो वहाँ आशीष पाने आते हैं,
वहीं
नये नियम की कलीसिया में स्वेच्छिक राजकीय याजक (Royal
Priests) होते हैं, जो
योग्य चेलों को सुसज्जित करते हैं ताकि वे परमेश्वर के राज्य को आगे बढ़ा सकें ।
(इफिसियों 4:11,12)
·
एक-दूसरे
के लिए:
नया
नियम (New Testament) पारस्परिक
संबंधों और कार्यों पर बल देता है, जिसमें
यूनानी शब्द “allelon” (एक-दूसरे)
का 100 से अधिक बार प्रयोग किया गया
है । इन पदों में विश्वासियों को एक-दूसरे के साथ परस्पर क्रियाशील होने की आज्ञा
दी गई है, जैसे:
एक-दूसरे
के भार उठाओ (गलातियों 6:2),
एक-दूसरे
को शांति दो (1 थिस्सलुनीकियों 4:18),
एक-दूसरे
को प्रोत्साहित करो और उन्नति करो (1 थिस्सलुनीकियों
5:11),
एक-दूसरे
को प्रेम और भले कामों के लिए उभाड़ो (इब्रानियों 10:24),
एक-दूसरे
के लिए प्रार्थना करो (याकूब 5:16),
एक-दूसरे
के प्रति आतिथ्यशील रहो (1 पतरस 4:9),
प्रभु
के भोज को खाने से पहले एक-दूसरे की प्रतीक्षा करो (1 कुरिन्थियों
11:20-23),
एक-दूसरे
के सामने अपने पापों को स्वीकार करो (याकूब 4:16),
प्रेम
से एक-दूसरे की सेवा करो (गलातियों 5:13),
एक-दूसरे
के पैर धोओ (यूहन्ना 13:14) ।
नये नियम की भविष्यवाणियाँ भविष्य बताने का अर्थ
नहीं रखतीं, बल्कि एक-दूसरे को शिक्षा देने,
प्रोत्साहित
करने और सांत्वना देने का अर्थ रखती हैं । (1 कुरिन्थियों
14:3) यहाँ तक कि एक-दूसरे के लिए
गाना भी-“भजनों, स्तुतिगीतों
और आत्मिक गीतों द्वारा एक-दूसरे को सिखाओ और सचेत करो, अपने
हृदय में अनुग्रह से प्रभु के लिए गाओ” (कुलुस्सियों 3:16)
।
आधुनिक कलीसिया में आप
केवल स्तुति गीत ही सुनते हैं, परन्तु
कभी यह नहीं सुनते कि एक-दूसरे को सिखाओ और चेताओ, या
महान आदेश (Great Commission) के
बारे में । हमारे गीतों की पुस्तकों को पुनः लिखने की तत्काल आवश्यकता है ।
सभा में कुछ गतिविधियाँ
ऊर्ध्वाधर होती हैं, जैसे प्रार्थना और
स्तुति, परन्तु अधिकांश क्षैतिज होती
हैं- एक-दूसरे को उन्नति देने वाली ।
यीशु ने कहा, “मैं
अपनी एक्लेसिया का निर्माण करूँगा और अधोलोक के फाटक उस पर प्रबल न होंगे”(मत्ती 16:18)
।
एक
परिपक्व एक्लेसिया में प्रशिक्षक और प्रशिक्षु होते हैं, जो
ऐसे चेलों को प्रशिक्षित करते हैं जो अधोलोक के द्वारों को ध्वस्त कर सकें और
परमेश्वर के राज्य को आगे बढ़ा सकें, उन
स्थानों को आत्मिक रूप से बदलकर जहाँ यह अभी तक नहीं पहुँचा । अपने प्रभाव वाले
क्षेत्र की आत्मिक संरचना को बदलना हर एक्लेसिया का लक्ष्य होना चाहिए ।
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