आपका अनन्तकाल का उत्तराधिकार
- परमेश्वर पिता ने अपने प्रत्येक सन्तान के लिये एक उत्तराधिकार चुना है कि वह जाकर एक अच्छी लड़ाई लड़कर उस पर कब्ज़ा करे तथा उस पर राज्य करे । (भजन संहिता 47:3-4; 2 तिमुथियुस 4:7-8; प्रकाशित वाक्य 5:10)
- परमेश्वर इस उत्तराधिकार को एक नियुक्त समय में
नहीं देगा, क्योंकि उसने आपको पहले ही दे दिया है ।
जहाँ-जहाँ आपका पैर रौंदेगा, वह स्थान आपको दे दिया है । पैर
रखने का मतलब है कि (प्रार्थना यात्रा द्वारा) शैतान के सिर को अपने पैरों के नीचे
कुचलना । (यहोशू 1:3, रोमियों 16:20, 1 तिमुथियुस 2:8)
- बिना उत्तराधिकार के आप पूर्ण मसीही नहीं हो
सकते । हर एक को अपना उत्तराधिकार माँगना है, और फिर उस पर
कब्ज़ा करना है । प्रभु यीशु को भी अपना उत्तराधिकार माँगना पड़ा। हम प्रभु यीशु
के संगी सह-उत्तराधिकारी हैं । (भजन संहिता 2:7-8; रोमियों 8:17)
- आपको परमेश्वर से एक या अनेक विशेष जाति (समूह)
को माँगना है, साथ में एक क्षेत्र को भी माँगना है ।
परमेश्वर ने कनान देश के फरात नदी जो इराक देश में है, वहाँ
से, नील नदी जो मिस्र देश में है, तथा 10
जातियों को अब्राहम को उत्तराधिकार के स्वरूप में दिया । पतरस
यहूदिया प्रान्त के यहूदियों का उत्तराधिकारी बना । पौलुस सारे गैर-यहूदियों को
यहूदी यरूशलेम से लेकर इल्लिरिकुम तक का उत्तराधिकारी बना तथा लुदिया को फिलिप्पी
और तीतुस को क्रेते का उत्तराधिकार मिला । (भजन 2:8; उत्पत्ति 15:18-21; गलातियों 2:6; रोमियों 15:17-19; तीतुस 1:5)
- प्रभु यीशु ने अपनी सेवकाई खोये हुओं को ढूँढने
और बचाने के द्वारा अपना उत्तराधिकार पाया । प्रभु ने सामरी स्त्री को सामरियों से
जोड़ा और गदरीनी के दुष्टात्मा से ग्रसित को दिकापुलिस (दस नगर) को अपने
उत्तराधिकार से जोड़ा । यह उनके परिवर्तन होने के तुरन्त बाद किया जबकि उनका जल
संस्कार भी नहीं हुआ था । (मत्ती 5:18-20;
यूहन्ना 4:39)
- केवल प्रार्थना करना, बाइबल पढ़ना, बाइबल कॉलेज जाना, प्रति सप्ताह चर्च में उपस्थित होने से हमें उत्तराधिकार प्राप्त नहीं
होता । परमेश्वर का वचन केवल ज्ञान के लिये ही नहीं है परन्तु आपके उत्तराधिकार को
प्राप्त करने के लिये विकसित करता है । प्रभु की आज्ञाओं को पूरा करना, जैसे - शिष्य बनाना, आपको उत्तराधिकार का हकदार
बनाता है । (मत्ती 28:18; प्रेरितों के
काम 20:32)
- परमेश्वर ने आदम को अदन की बारी का उत्तराधिकारी
बनाया था,
परन्तु उसने अनाज्ञाकारिता से उसे खो दिया । एसाव ने अपना
उत्तराधिकार एक कटोरी दाल के लिये खो दिया । यहूदा इस्करियोत ने 30 चाँदी के सिक्कों के लिये अपना उत्तराधिकार बेच दिया । आत्मिक अंधेपन से
मसीही आज अपना उत्तराधिकार खो बैठे हैं । (रोमियों 11:25;
2 कुरिन्थियों 4:4; इफिसियों
4:17-18)
- परमेश्वर पिता ने अपने प्रत्येक पुत्र/पुत्री को
दान,
वरदान के तोड़े दिये हैं कि वे सब इस्तेमाल करें । जो अपने
वरदान/तोड़े को बढ़ायेगा, उसे अनेक नगरों पर राज्य करने के
लिये प्रभु अधिकारी ठहराएगा । (लूका 19:13-26)
- प्रत्येक नारी को भी उसका उत्तराधिकार अवश्य
मिलना चाहिए । रिबका को उसके परिवार ने आशीषित किया कि उसके हजारों-हजार सन्तान, शत्रुओं के नगरों पर अधिकारी हों । इसी प्रकार प्रत्येक मसीही को रिबका की
आशीष को अपनाकर तथा हजारों आत्मिक सन्तान (शिष्य) पैदा करके शत्रुओं को हटाकर अपना
उत्तराधिकार स्थापित करना है । (उत्पत्ति 24:57-60)
- प्रभु यीशु ने शिक्षा दी कि अपना धन
(उत्तराधिकार) स्वर्ग में इकट्ठा करो, परन्तु हम
अपने जीवन की अन्तिम श्वास तक सांसारिक धन संग्रह करते हैं, जो
चोर चुरा लेते और कीड़ा खराब करते हैं । (लूका 12:29-34)
- परमेश्वर ने इस्राएल को केवल कनान देश दिया, परन्तु उसने हमें पूरा विश्व हमारे उत्तराधिकार में दे दिया । सम्पूर्ण
धरती बड़ी आशा भरी दृष्टि से शान्ति के पुत्रों के प्रगट होने की बाट जोह रही है,
जो श्राप के बन्धन को तोड़कर उसका उद्धार करें । (मत्ती 5:5; रोमियों 8:19-21)
- प्रभु ने पौलुस को आज्ञा दी कि लोगों की आँखें
खोले,
जो अंधकार में हैं उन्हें ज्योति की ओर तथा शैतान के राज्य से
परमेश्वर के राज्य में लाये, फिर उन्हें पश्चाताप कराकर उनके
उत्तराधिकार से जोड़े । (प्रेरितों के काम 26:18)
- कलीसिया का एक प्रमुख कार्य है कि प्रत्येक
विश्वासी को उसके उत्तराधिकार से जोड़े, जो अविनाशी,
निष्कलंक और अमिट है । (1 पतरस 1:4-9)
- यहोशू के समान कलीसिया को एक योजना बनाना आवश्यक
है,
जो प्रभु यीशु के दर्शन पर आधारित है, जिसके
द्वारा महान आदेश की पूर्ति हो सके, और हर एक मसीही अपने
उत्तराधिकार (हर जाति, कुल और गोत्र) के साथ प्रभु के
द्वितीय आगमन की बाट जोहे । (यहोशू 18:3-9)
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